दिल्ली में चक्कर आने की सर्जरी क्या है और यह कैसे काम करती है?

🩺 Docvani — Indian Vernacular Health Education

Language: हिंदी | City: Delhi
Chapter 5 of 9: ऑपरेशन क्या होता है (Surgery Explainer)

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भारत में 90% से ज़्यादा मेडिकल जानकारी अंग्रेज़ी में है। मैंने Docvani बनाया है ताकि मेरा क्लीनिकल अनुभव सरल हिंदी में हर मरीज़ तक पहुँचे।

✍️ AI draft — Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB (ENT), CAMVD) द्वारा शब्द-दर-शब्द मेडिकल ऑडिट (NMC: 82487) — 2026-03-19

चक्कर आना - चक्कर आना

मेरे clinic में हर हफ्ते ऐसे कई मरीज़ आते हैं जो अचानक चक्कर आने से घबरा जाते हैं। जब सब कुछ घूमने लगता है, सिर में चक्कर आने लगते हैं, तो यह बहुत डरावना हो सकता है। दिल्ली और आसपास के इलाकों जैसे नोएडा, गुड़गांव, फरीदाबाद, गाजियाबाद, मेरठ और आगरा से भी कई लोग इस समस्या के लिए सलाह लेने आते हैं। अच्छी बात यह है कि ज़्यादातर मामलों में चक्कर का इलाज संभव है और आप बेहतर महसूस कर सकते हैं।

जब सब कुछ घूमने लगे, तो क्या करें?

जब आपको या आपके आसपास की चीज़ों को घूमता हुआ महसूस हो, तो इसे चक्कर आना या चक्कर आना कहते हैं। यह सिर्फ कमज़ोरी नहीं है, बल्कि अक्सर आपके कान के अंदरूनी हिस्से या दिमाग के संतुलन वाले हिस्से से जुड़ी एक समस्या होती है। मेरे Prime ENT Center में, मैंने देखा है कि यह शिकायत लेकर आने वाले मरीज़ अक्सर बहुत परेशान होते हैं, उन्हें लगता है कि कोई गंभीर बीमारी हो गई है। पर घबराने की ज़रूरत नहीं है। यह एक बहुत आम समस्या है, और सही जांच से इसका कारण पता लगाकर इलाज किया जा सकता है।

यह समझना ज़रूरी है कि चक्कर आना अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह किसी और समस्या का लक्षण है। जैसे बुखार एक लक्षण होता है, वैसे ही चक्कर भी। दुनिया भर में, डॉक्टर के पास जाने के टॉप 3 कारणों में से एक चक्कर आना है। अपनी ज़िंदगी में 20 से 40% लोगों को कभी न कभी चक्कर का अनुभव होता है, और उम्र बढ़ने के साथ यह और आम हो जाता है।

चक्कर आना क्या है?

चक्कर आना एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपको लगता है कि आप खुद घूम रहे हैं या आपके आसपास की चीज़ें घूम रही हैं, जबकि असल में ऐसा कुछ नहीं हो रहा होता। यह एक झूठा घूमने का एहसास है। कई बार लोग इसे सिर्फ ‘चक्कर’ या ‘सिर घूमना’ कह देते हैं, पर चक्कर आने में यह घूमने का एहसास बहुत तेज़ और परेशान करने वाला होता है। यह सिर्फ हल्का सिर भारी लगना या आँखों के आगे अंधेरा छाना नहीं है, बल्कि एक वास्तविक घूमने का अनुभव है।

यह एहसास कुछ सेकंड से लेकर कई दिनों तक रह सकता है। यह आपके रोज़मर्रा के कामों को बहुत मुश्किल बना सकता है, जैसे चलना, गाड़ी चलाना या सिर्फ खड़े रहना। मेरे पास ऐसे मरीज़ आते हैं जो कहते हैं कि उन्हें धरती हिलती लगती है, या चलने में लड़खड़ाहट महसूस होती है। यह सब चक्कर आने के लक्षण हो सकते हैं।

चक्कर आने के लक्षण

चक्कर आने के साथ कई तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैं, जो हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। इन लक्षणों को पहचानना ज़रूरी है ताकि सही कारण का पता लगाया जा सके:

  • घूमने का एहसास: आपको लगता है कि कमरा घूम रहा है या आप खुद गोल-गोल घूम रहे हैं। यह सबसे आम और परेशान करने वाला लक्षण है।
  • अस्थिरता और चलने में दिक्कत: आपको संतुलन खोना या चलने में लड़खड़ाहट महसूस हो सकती है, जिससे गिरने का डर रहता है।
  • उल्टी जैसा महसूस होना और उल्टी: चक्कर के साथ अक्सर जी मिचलाना और उल्टी आने की इच्छा होती है, खासकर जब चक्कर तेज़ हो।
  • असामान्य आँखों की हरकतें: डॉक्टर जांच के दौरान आपकी आँखों की कुछ खास हरकतें देख सकते हैं, जो चक्कर आने का संकेत होती हैं।
  • पसीना आना और घबराहट: चक्कर के दौरान आपको पसीना आ सकता है और त्वचा चिपचिपी महसूस हो सकती है।
  • सिर हिलाने पर बिगड़ना: सिर को अचानक हिलाने या किसी खास पोज़िशन में रखने पर चक्कर और तेज़ हो सकते हैं, जैसे झुकने पर चक्कर आना।
  • ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत: चक्कर के दौरान आँखों को किसी एक चीज़ पर टिकाना मुश्किल हो सकता है।
  • मुँह से पानी आना: कुछ लोगों को चक्कर के साथ मुँह में ज़्यादा पानी आने की शिकायत भी होती है।

यह लक्षण कुछ सेकंड (जैसे BPPV में) से लेकर कई दिनों तक (जैसे vestibular neuritis में) रह सकते हैं।

चक्कर आने के कारण

चक्कर आने के कई कारण हो सकते हैं, और इसका इलाज पूरी तरह से कारण पर निर्भर करता है। मुख्य रूप से, चक्कर आने को दो बड़े हिस्सों में बांटा जा सकता है:

1. पेरिफेरल चक्कर आना (Peripheral चक्कर आना):
यह सबसे आम प्रकार है, लगभग 80% मामलों में यही होता है। इसमें समस्या आपके कान के अंदरूनी हिस्से में होती है, जो शरीर का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

  • BPPV (Benign Paroxysmal Positional चक्कर आना): यह चक्कर का सबसे आम कारण है। हमारे कान के अंदरूनी हिस्से में छोटे-छोटे कैल्शियम के crystals होते हैं जिन्हें otolith कहते हैं। जब ये crystals अपनी जगह से हिलकर semicircular canals में चले जाते हैं, तो सिर हिलाने पर तेज़ चक्कर आते हैं, खासकर सुबह बिस्तर से उठते समय या करवट बदलते समय। यह चक्कर कुछ सेकंड के लिए ही रहता है।
  • Vestibular Neuritis या Labyrinthitis: यह कान के अंदरूनी हिस्से की नस या पूरे अंदरूनी कान में वायरल इन्फेक्शन की वजह से होता है। इसमें अचानक तेज़ चक्कर आते हैं जो कई दिनों तक रह सकते हैं, साथ में उल्टी और अस्थिरता भी होती है। Labyrinthitis में सुनने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।
  • Meniere’s Disease: यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें कान के अंदरूनी हिस्से में तरल पदार्थ जमा हो जाता है। इसके लक्षणों में बार-बार तेज़ चक्कर आना, कान में घंटी बजना, सुनने में कमी और कान में भारीपन महसूस होना शामिल है।
  • माइग्रेन से जुड़ा चक्कर आना (Vestibular Migraine): जिन लोगों को माइग्रेन की समस्या होती है, उन्हें बिना सिरदर्द के भी चक्कर आ सकते हैं। यह चक्कर कुछ मिनट से लेकर कई घंटों तक रह सकता है।
  • दवाइयों के साइड इफेक्ट्स: कुछ दवाइयां, जैसे ब्लड प्रेशर की दवाएं या नींद की गोलियां, चक्कर का कारण बन सकती हैं।
  • सिर में चोट या Whiplash: सिर या गर्दन में चोट लगने से भी कान के संतुलन वाले हिस्से पर असर पड़ सकता है।

2. सेंट्रल चक्कर आना (Central चक्कर आना):
यह कम आम है (लगभग 20% मामले) लेकिन ज़्यादा गंभीर हो सकता है। इसमें समस्या दिमाग के उस हिस्से में होती है जो संतुलन को नियंत्रित करता है, जैसे brainstem या cerebellum।

  • स्ट्रोक: दिमाग के इन हिस्सों में खून की सप्लाई कम होने से स्ट्रोक हो सकता है, जिससे तेज़ चक्कर आ सकते हैं। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है।
  • ट्यूमर: दिमाग में ट्यूमर भी चक्कर का कारण बन सकता है, हालांकि यह दुर्लभ है।
  • माइग्रेन: जैसा कि ऊपर बताया गया है, माइग्रेन सेंट्रल चक्कर आने का भी कारण बन सकता है।
  • चिंता और पैनिक अटैक: कभी-कभी बहुत ज़्यादा चिंता या पैनिक अटैक के कारण भी चक्कर जैसा महसूस हो सकता है, हालांकि यह आमतौर पर असली चक्कर आना नहीं होता, बल्कि एक तरह की लाइटहेडेडनेस होती है।

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर, खासकर सर्दियों में (नवंबर-फरवरी), बहुत ज़्यादा होता है। AQI अक्सर 400 से ऊपर चला जाता है। पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से ज़हरीला धुआं बनता है, जिससे साइनस, एलर्जिक राइनाइटिस और सांस की अन्य समस्याएं बढ़ जाती हैं। हालांकि सीधे तौर पर चक्कर आने से इसका संबंध कम है, पर कुछ लोगों में एलर्जी या साइनस की गंभीर समस्या से भी कान पर दबाव पड़ सकता है, जिससे संतुलन पर हल्का असर पड़ सकता है।

चक्कर आने की जांच कैसे होती है?

जब आप मेरे Prime ENT Center में चक्कर की शिकायत लेकर आते हैं, तो सबसे पहले मैं आपकी पूरी बात सुनता हूँ। आपकी medical history, चक्कर कब और कैसे आते हैं, कितने समय तक रहते हैं, और किन चीज़ों से बेहतर या बदतर होते हैं, यह सब जानना बहुत ज़रूरी है। इसके बाद, मैं कुछ खास जांचें करता हूँ ताकि चक्कर के असली कारण का पता लगाया जा सके।

  • शारीरिक जांच: मैं आपके कान, नाक और गले की जांच करता हूँ। आपके संतुलन और आँखों की हरकतों को भी देखता हूँ।
  • Dix-Hallpike test: यह BPPV का पता लगाने के लिए gold standard जांच है। इसमें मरीज़ को एक खास तरीके से लिटाकर सिर को एक तरफ झुकाया जाता है। अगर BPPV है, तो इस दौरान तेज़ चक्कर आते हैं और आँखों में खास तरह की हरकत दिखती है।
  • VNG (Videonystagmography): यह एक और ज़रूरी जांच है जो आँखों की हरकतों को रिकॉर्ड करती है। हमारे कान का संतुलन वाला हिस्सा आँखों की हरकतों से जुड़ा होता है। VNG से यह पता चलता है कि आपके किस कान में समस्या है और संतुलन प्रणाली कैसे काम कर रही है।
  • VEMP (Vestibular Evoked Myogenic Potentials) और ECoG (Electrocochleography): अगर Meniere’s disease का संदेह हो, तो ये जांचें कान के अंदरूनी हिस्से में तरल पदार्थ के दबाव और नस की प्रतिक्रिया को मापने में मदद करती हैं।
  • PTA (Pure Tone Audiometry): अगर सुनने में कमी की शिकायत हो, तो यह सुनने की जांच की जाती है ताकि यह पता चल सके कि सुनने की क्षमता कितनी प्रभावित हुई है।
  • MRI या CT scan: अगर मुझे लगता है कि समस्या कान से आगे दिमाग में हो सकती है (सेंट्रल चक्कर आने का संदेह), तो मैं दिमाग का MRI या CT scan करवाने की सलाह दे सकता हूँ। यह स्ट्रोक, ट्यूमर या दिमाग की अन्य समस्याओं का पता लगाने में मदद करता है।

इन सभी जांचों के बाद ही मैं एक सटीक निदान पर पहुँच पाता हूँ और आपके लिए सबसे अच्छा इलाज तय कर पाता हूँ।

चक्कर आने का इलाज कैसे होता है?

चक्कर आने का इलाज पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि चक्कर का असली कारण क्या है। हर मरीज़ के लिए इलाज का तरीका अलग हो सकता है।

  • BPPV के लिए: अगर Dix-Hallpike test से BPPV का पता चलता है, तो Epley Maneuver बहुत असरदार है। इसमें डॉक्टर आपके सिर और शरीर को कुछ खास पोज़िशन्स में घुमाते हैं ताकि वे crystals अपनी सही जगह पर वापस आ जाएं। ज़्यादातर मरीज़ों को एक या दो सेशन में ही आराम मिल जाता है। कुछ मरीज़ों को घर पर Brandt-Daroff exercises करने की सलाह भी दी जा सकती है।
  • Vestibular Neuritis या Labyrinthitis के लिए: इस स्थिति में डॉक्टर anti-चक्कर आना दवाइयां और anti-nausea दवाइयां दे सकते हैं ताकि लक्षणों से आराम मिले। कभी-कभी सूजन कम करने के लिए steroids भी दिए जाते हैं। इसके साथ ही, vestibular rehabilitation exercises भी बहुत ज़रूरी हैं जो आपके दिमाग को संतुलन प्रणाली के साथ बेहतर तालमेल बिठाने में मदद करती हैं।
  • Meniere’s Disease के लिए: Meniere’s disease के प्रबंधन में नमक कम करना बहुत ज़रूरी है। डॉक्टर diuretics भी दे सकते हैं। कुछ मामलों में, अगर दवाइयों से आराम नहीं मिलता, तो कान के अंदर इंजेक्शन या सर्जरी पर भी विचार किया जा सकता है।
  • माइग्रेन से जुड़े चक्कर आने के लिए: इसमें माइग्रेन के इलाज वाली दवाइयां और जीवनशैली में बदलाव मदद करते हैं।
  • दवाइयों के कारण चक्कर आना: अगर किसी दवाई के साइड इफेक्ट के कारण चक्कर आ रहे हैं, तो डॉक्टर उस दवाई को बदलने या उसकी खुराक कम करने की सलाह दे सकते हैं।
  • संतुलन के लिए व्यायाम: यह खास तरह के व्यायाम होते हैं जो आपके दिमाग और संतुलन प्रणाली को फिर से प्रशिक्षित करते हैं। ये व्यायाम चक्कर आने के बाद संतुलन को बेहतर बनाने में बहुत मदद करते हैं।
  • दवाइयां: आपके डॉक्टर चक्कर और उल्टी को कम करने के लिए कुछ दवाइयां दे सकते हैं। ये दवाइयां लक्षणों से तुरंत आराम दिलाती हैं, लेकिन कारण का इलाज करना ज़्यादा ज़रूरी है।

इलाज के दौरान, आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:
* जब तक चक्कर आ रहे हों, गाड़ी चलाने या ऊंचाई पर जाने से बचें।
* खूब पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेटेड रखें।
* अचानक सिर हिलाने से बचें।
* अगर आपको चक्कर आते हैं, तो गिरने से बचने के लिए अपने घर को सुरक्षित बनाएं (जैसे फर्श पर चीज़ें न बिखेरें)।

कब डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है?

ज़्यादातर चक्कर के मामले गंभीर नहीं होते, लेकिन कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। इन्हें “red flags” कहते हैं और इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से मिलना या इमरजेंसी में जाना ज़रूरी है:

  • अचानक तेज़ सिरदर्द के साथ चक्कर: अगर चक्कर के साथ अचानक और बहुत तेज़ सिरदर्द हो, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
  • दोहरी दृष्टि या बोलने/निगलने में दिक्कत: चक्कर के साथ अगर आपको दो चीज़ें दिखें, या बोलने में लड़खड़ाहट हो, या खाना निगलने में परेशानी हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
  • अचानक चेहरे पर सुन्नपन या कमज़ोरी: अगर चक्कर के साथ आपके चेहरे के एक तरफ सुन्नपन या कमज़ोरी महसूस हो, तो यह स्ट्रोक का लक्षण हो सकता है।
  • चलने में असमर्थता: अगर चक्कर के साथ आप चल न पाएं या बहुत ज़्यादा लड़खड़ाहट हो, तो यह गंभीर हो सकता है।
  • सिर में चोट के बाद नए चक्कर: अगर हाल ही में सिर में चोट लगी हो और उसके बाद चक्कर आने लगें, तो जांच करवाना ज़रूरी है।
  • 60 साल से ज़्यादा उम्र में पहली बार चक्कर: अगर 60 साल से ज़्यादा उम्र के व्यक्ति को पहले कभी चक्कर नहीं आए और अब अचानक आने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है ताकि किसी गंभीर कारण को खारिज किया जा सके।

अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।

चक्कर आने के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या चक्कर आना ब्लड प्रेशर से संबंधित है?

मैं समझता हूँ कि कई लोगों को लगता है कि चक्कर सिर्फ ब्लड प्रेशर के कारण आते हैं। कम ब्लड प्रेशर, खासकर जब आप तेज़ी से खड़े होते हैं (जिसे orthostatic hypotension कहते हैं), तो इससे हल्का सिर घूमना या अस्थिरता महसूस हो सकती है। हालांकि, असली चक्कर आना आमतौर पर कान के अंदरूनी हिस्से या दिमाग की समस्या के कारण होता है, न कि मुख्य रूप से ब्लड प्रेशर की वजह से। आपके डॉक्टर दोनों की जांच करेंगे ताकि सही कारण का पता चल सके।

क्या चक्कर आना ब्रेन स्ट्रोक का संकेत हो सकता है?

हाँ, स्ट्रोक के कारण चक्कर आना हो सकता है, लेकिन यह शायद ही कभी अकेला लक्षण होता है। स्ट्रोक से जुड़े चक्कर आने के साथ आमतौर पर अन्य चेतावनी के संकेत भी होते हैं: जैसे अचानक दोहरी दृष्टि, बोलने या निगलने में दिक्कत, चेहरे पर सुन्नपन, हाथ या पैर में कमज़ोरी, या चलने में असमर्थता। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण चक्कर आने के साथ महसूस हो, तो तुरंत इमरजेंसी में जाएं।

चक्कर आना और Dizziness में क्या अंतर है?

मैं जानता हूँ कि इन दोनों शब्दों को अक्सर एक दूसरे की जगह इस्तेमाल किया जाता है। Dizziness एक व्यापक शब्द है जिसका मतलब अस्थिरता, हल्का सिर घूमना या बेहोशी जैसा महसूस होना है। चक्कर आना विशेष रूप से एक झूठा घूमने का एहसास है – जैसे आपको या कमरे को घूमता हुआ महसूस हो। चक्कर आना आमतौर पर कान के अंदरूनी हिस्से या दिमाग की समस्या का संकेत देता है। वहीं, हल्का सिर घूमना (बिना घूमने के एहसास के) कम ब्लड प्रेशर, चिंता या पानी की कमी के कारण हो सकता है।

क्या मुझे पूरी ज़िंदगी चक्कर आना रहेगा?

नहीं, ज़्यादातर चक्कर आने के कारणों का इलाज संभव है। BPPV (सबसे आम कारण) को ज़्यादातर मामलों में एक साधारण maneuver से ठीक किया जा सकता है। Vestibular neuritis आमतौर पर कुछ हफ्तों से महीनों के भीतर ठीक हो जाता है। Meniere’s disease एक पुरानी स्थिति है लेकिन इसे दवाइयों और जीवनशैली में बदलाव से नियंत्रित किया जा सकता है। सही निदान और इलाज से बार-बार आने वाले चक्कर में भी काफी सुधार होता है।

क्या चक्कर आने के लिए कोई सर्जरी होती है?

मैं समझता हूँ कि मरीज़ अक्सर सोचते हैं कि हर समस्या का हल सर्जरी है। ज़्यादातर चक्कर आने के मामलों में सर्जरी की ज़रूरत नहीं पड़ती। BPPV का इलाज Epley Maneuver से होता है, जो एक गैर-सर्जिकल प्रक्रिया है। Vestibular neuritis और Meniere’s disease का इलाज आमतौर पर दवाइयों और जीवनशैली में बदलाव से होता है। बहुत ही दुर्लभ और गंभीर मामलों में, जब अन्य सभी इलाज विफल हो जाते हैं, तब कुछ खास तरह की सर्जरी पर विचार किया जा सकता है, लेकिन यह बहुत कम होता है।

क्या मैं घर पर चक्कर आने का इलाज कर सकता हूँ?

मैं जानता हूँ कि लोग अक्सर घर पर ही आराम पाने की कोशिश करते हैं। हल्के चक्कर के लिए आराम करना और अचानक सिर हिलाने से बचना मदद कर सकता है। लेकिन अगर आपको बार-बार या तेज़ चक्कर आते हैं, तो घर पर खुद से इलाज करने की कोशिश न करें। खासकर अगर आपको BPPV है, तो Epley Maneuver जैसे इलाज के लिए डॉक्टर की ज़रूरत होती है। गलत तरीके से किए गए व्यायाम से समस्या और बिगड़ सकती है।

क्या चक्कर आना चिंता या तनाव के कारण हो सकता है?

हाँ, चिंता और तनाव सीधे तौर पर चक्कर आने का कारण नहीं बनते, लेकिन वे इसे ट्रिगर कर सकते हैं या इसके लक्षणों को बदतर बना सकते हैं। कुछ लोगों को पैनिक अटैक के दौरान चक्कर जैसा महसूस होता है, जिसे psychogenic dizziness कहते हैं। अगर आपको लगता है कि आपकी चिंता आपके चक्कर को बढ़ा रही है, तो डॉक्टर से बात करें।

चक्कर आना होने पर क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?

मैं समझता हूँ कि लोग अक्सर अपनी डाइट को लेकर चिंतित रहते हैं। Meniere’s disease वाले मरीज़ों को नमक कम खाने की सलाह दी जाती है। कुछ लोगों को कैफीन, शराब और चॉकलेट से भी चक्कर बढ़ सकते हैं। हालांकि, ज़्यादातर चक्कर आने के मामलों में कोई खास डाइट नहीं होती। अपने डॉक्टर से पूछें कि आपके लिए क्या सही है।

ऑनलाइन कंसल्टेशन कैसे लें

दिल्ली और आसपास के इलाकों जैसे नोएडा, गुड़गांव, फरीदाबाद, गाजियाबाद, मेरठ और आगरा के मरीज़ों के लिए, मैं डॉ. प्रतीक पोरवाल, Prime ENT Center, हरदोई से, ऑनलाइन कंसल्टेशन की सुविधा प्रदान करता हूँ। अगर आप मेरे क्लिनिक तक नहीं आ सकते, तो आप घर बैठे ही विशेषज्ञ ENT मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

आप WhatsApp या वीडियो कॉल के ज़रिए मुझसे संपर्क कर सकते हैं। अपनी रिपोर्टें साझा कर सकते हैं और अपनी समस्या पर विस्तार से चर्चा कर सकते हैं। मैं आपकी रिपोर्टों को देखकर और आपकी पूरी बात सुनकर आपको सही सलाह और इलाज का रास्ता बता सकता हूँ।

ऑनलाइन कंसल्टेशन के लिए आप इस नंबर पर WhatsApp या कॉल कर सकते हैं: +91-7393062200।
आप मेरी वेबसाइट https://primeentcenter.in पर भी अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
आपकी सेहत सबसे ज़रूरी है, और सही समय पर सही सलाह मिलना बहुत मायने रखता है।

अस्वीकरण

यह article सिर्फ educational purpose के लिए है। यह किसी भी तरह से doctor की सलाह, जाँचे या इलाज की जगह नहीं ले सकता। कोई भी दवाई या इलाज अपने doctor की सलाह के बिना शुरू या बंद ना करें।

Medically reviewed by: Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB ENT | Last updated: 01 March 2026


⚕️ मेडिकल डिस्क्लेमर

यह जानकारी शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। अपनी स्वास्थ्य समस्या के लिए हमेशा ENT विशेषज्ञ से मिलें।

Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB (ENT), CAMVD) | About | Prime ENT Center, Hardoi

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Dr. Prateek Porwal
MBBS, DNB ENT, CAMVD — Vertigo & ENT Specialist

Founder, Prime ENT Center, Hardoi, UP. Inventor of the Bangalore Maneuver for BPPV. Only VNG + Stabilometry clinic in Central UP. Online consultations available across India — drprateekporwal.com · 7393062200

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Frequently Asked Questions

चक्कर आना कौन सी बीमारी का लक्षण है?

देखिए, चक्कर आना एक लक्षण है, बीमारी नहीं। मेरे क्लिनिक में जो रोगी आते हैं, उनमें कई कारण होते हैं - कान की समस्या, गर्दन की नस दब जाना, ब्लड प्रेशर, या फिर ब्रेन से जुड़ी कोई बात। सबसे आम कारण है बेनाइन पैरॉक्सिस्मल पोजिशनल वर्टिगो यानी BPPV। यह एक तरह की क्रिस्टल जैसी चीज़ें कान के अंदर हिल जाती हैं। मैं आमतौर पर रोगियों को बताता हूँ कि पहले सही निदान जरूरी है। स्कैन, हियरिंग टेस्ट, और कुछ स्पेशल टेस्ट करके हम समझते हैं कि समस्या कहाँ है। घबराने की बात नहीं है - ज्यादातर चक्कर आना ठीक हो जाता है।

चक्कर आना तुरंत कैसे ठीक करें?

तुरंत राहत के लिए मैं कुछ बातें बताता हूँ। पहला - अगर चक्कर आ रहे हैं तो कहीं सुरक्षित जगह बैठ या लेट जाएँ। गिरने का खतरा होता है। दूसरा - सिर को धीरे-धीरे घुमाएँ, अचानक नहीं। अगर BPPV है तो मैं Epley maneuver करता हूँ - यह एक खास तरीका है सिर को अलग-अलग पोजिशन में ले जाने का। पाँच मिनट में ही बहुत लोगों को राहत मिल जाती है। घर पर बैठते समय गर्दन को सहारा दें, हल्का गर्म पानी पिएँ। लेकिन स्थायी समाधान के लिए आना जरूरी है - क्योंकि बार-बार चक्कर आने का कारण जानना पड़ता है।

किस उम्र में चक्कर आने की समस्या ज्यादा होती है?

मेरे अनुभव में, यह सभी उम्र में होता है, लेकिन पैटर्न अलग होता है। बुजुर्ग लोगों में - मतलब 50 साल के बाद - BPPV और वेस्टिबुलर न्यूरिटिस ज्यादा आम है। युवाओं में अक्सर यह इनफेक्शन या स्ट्रेस से संबंधित होता है। बच्चों में कभी-कभी यह मिग्रेन या कान के इनफेक्शन से जुड़ा होता है। मुझे याद है एक 35 साल का मरीज आया था जिसे तनाव की वजह से चक्कर आ रहे थे। उसे दवा और काउंसलिंग से ठीक हुआ। तो उम्र एक बात है, लेकिन सही कारण खोजना जरूरी है। हर व्यक्ति अलग होता है।

बुखार में चक्कर क्यों आते हैं?

यह एक अच्छा सवाल है। जब बुखार आता है, तो शरीर की तरंग-तुल्यता (बैलेंस) प्रभावित होती है। डिहाइड्रेशन होता है - शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इससे ब्लड प्रेशर गिरता है और चक्कर आते हैं। दूसरा, बुखार से कान के अंदर की द्रव्य (फ्लूइड) पर असर पड़ता है जो हमारे बैलेंस को नियंत्रित करता है। मॉनसून में जब बहुत लोगों को बुखार-खांसी होती है, तब मेरे क्लिनिक में चक्कर के मरीज़ बढ़ जाते हैं। इलाज सरल है - खूब पानी पिएँ, बिस्तर पर आराम करें, और बुखार ठीक होने दें। लेकिन अगर बुखार ठीक होने के बाद भी चक्कर रहें, तो जरूर दिखाएँ।

घरेलू उपाय से चक्कर आना ठीक हो सकता है?

हाँ, कुछ चीजें हैं जो मदद करती हैं, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या क्या है। अदरक की चाय, पुदीना - ये थोड़ी राहत दे सकते हैं। खाने में नमक कम करें क्योंकि कभी-कभी ज्यादा नमक से कान में द्रव्य बढ़ता है। दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएँ। सिर को हल्का रखें - तकिया अच्छा लगाएँ। लेकिन मैं कभी नहीं कहता कि सिर्फ घरेलू उपाय काफी हैं। एक बार सही डायग्नोसिस हो जाए, तो हम 10,000 से 15,000 रुपये में पूरा ट्रीटमेंट कर देते हैं। बिना जाने दवा लेना खतरनाक हो सकता है। आइए क्लिनिक आकर पता करते

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