नाक से खून क्यों आता है? — Varanasi

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लेखक: डॉ. प्रतीक पोरवाल (Dr. Prateek Porwal), MBBS, DNB (ENT), CAMVD  |  अनुभव: 13+ वर्ष

Prime ENT Center — online consultation available

Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB (ENT), CAMVD) द्वारा चिकित्सकीय समीक्षा — 2026-04-10  |  अंतिम चिकित्सा समीक्षा: 2026-04-10

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नाक से खून आना क्यों होता है — वाराणसी

अगर अचानक नाक से खून आने लगे, जिसे आम भाषा में नकसीर भी कहते हैं, तो यह देखकर कोई भी घबरा सकता है। यह समस्या आपकी रोज़मर्रा की गतिविधियों, जैसे काम या पढ़ाई, को बाधित कर सकती है, और कई बार तो नींद भी खराब कर देती है। मेरे Prime ENT Center में वाराणसी से ऐसे कई मरीज़ ऑनलाइन परामर्श लेते हैं, जो बताते हैं कि धूल-मिट्टी या गर्मी के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती है।

इसे डॉक्टरी भाषा में Epistaxis कहते हैं, और यह एक आम लेकिन परेशान करने वाली स्थिति है।

अभी क्या करें?

  • घर पर राहत: अगर नाक से खून आने लगे, तो सबसे पहले शांत बैठ जाएं और अपने सिर को थोड़ा आगे की ओर झुका लें। अपनी नाक के नरम हिस्से (नथुनों के ठीक ऊपर) को अपनी उंगलियों से कसकर 10-15 मिनट तक दबाकर रखें। मुंह में आने वाले खून को निगलने के बजाय थूक दें।
  • डॉक्टर को दिखाएं: अगर 15-20 मिनट तक लगातार दबाव डालने के बाद भी खून बहना बंद न हो, या आपको बार-बार नकसीर आती हो, तो तुरंत किसी ENT विशेषज्ञ से सलाह लें। खासकर अगर आप खून पतला करने वाली दवाएं ले रहे हों।
  • तुरंत जाएं: अगर खून बहुत तेज़ी से बह रहा हो, गले से नीचे जा रहा हो, या आपको चक्कर या कमज़ोरी महसूस हो, तो बिना देर किए इमरजेंसी में जाएं। यह गंभीर स्थिति हो सकती है जिसमें तुरंत मेडिकल सहायता की ज़रूरत होती है।

नाक से खून निकलने से कौन सी बीमारी होती है?

नाक से खून आना अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह किसी अंदरूनी समस्या का लक्षण हो सकता है। ज़्यादातर मामलों में, यह कोई गंभीर बीमारी नहीं होती और नाक के अंदर की छोटी रक्त वाहिकाओं के फटने से होता है। इसे anterior epistaxis कहते हैं, जो नाक के सामने वाले हिस्से से होता है और आमतौर पर घर पर ही रुक जाता है।

नाक से खून आना — नाक से खून आना

हालांकि, कुछ मामलों में यह किसी बड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है, खासकर अगर खून नाक के पिछले हिस्से से आ रहा हो और गले से नीचे जा रहा हो।

कई बार, नाक से खून आने का कोई स्पष्ट कारण नहीं मिल पाता, जिसे idiopathic epistaxis कहते हैं। यह बच्चों और बुज़ुर्गों में ज़्यादा देखा जाता है। WHO के मुताबिक, नाक से खून आना ENT मरीज़ों में मृत्यु दर का दूसरा सबसे प्रमुख कारण है, जो सिर और गर्दन के कैंसर के बाद आता है।

इसलिए, इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर आपको बार-बार नकसीर आती है, तो एक ENT विशेषज्ञ से जांच करवाना बहुत ज़रूरी है।

तुरंत डॉक्टर के पास कब जाएं?

कुछ स्थितियाँ ऐसी होती हैं जब नाक से खून आने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाना बहुत ज़रूरी हो जाता है। इन संकेतों को नज़रअंदाज़ करना ख़तरनाक हो सकता है।

  • तेज़ और अनियंत्रित खून बहना: अगर नाक से बहुत तेज़ी से खून आ रहा हो और 10-15 मिनट तक नाक दबाने के बाद भी न रुके, तो यह गंभीर हो सकता है। यह posterior epistaxis का संकेत हो सकता है, जिसे रोकने के लिए विशेष इलाज की ज़रूरत होती है।
  • खून पतला करने वाली दवाओं का सेवन: अगर आप warfarin या कोई और खून पतला करने वाली दवा ले रहे हैं और आपको नकसीर आती है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। इन दवाओं के कारण खून बहना मुश्किल से रुकता है और कई जगहों से खून आ सकता है।
  • लगातार खून से सना हुआ डिस्चार्ज: अगर नाक से सिर्फ खून नहीं, बल्कि लगातार खून से सना हुआ पानी या डिस्चार्ज आ रहा हो, तो यह नाक में किसी ट्यूमर का संकेत हो सकता है। इसकी तुरंत जांच करवाना ज़रूरी है।
  • बार-बार नकसीर के साथ त्वचा पर लाल धब्बे: अगर आपको बार-बार नकसीर आती है और आपकी त्वचा या मुंह के अंदर छोटे-छोटे लाल धब्बे दिखते हैं, तो यह Hereditary Haemorrhagic Telangiectasia (HHT) नामक एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी का लक्षण हो सकता है।
  • कमज़ोरी या चक्कर आना: अगर नाक से खून बहने के साथ आपको बहुत ज़्यादा कमज़ोरी, चक्कर आना, या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो इसका मतलब है कि शरीर में खून की कमी हो रही है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है और तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

नाक से खून आना / Nosebleed के लक्षण

नाक से खून आना एक ऐसा लक्षण है जिसे पहचानना आसान है, लेकिन इसके कुछ अलग-अलग रूप हो सकते हैं। इसे समझना ज़रूरी है ताकि आप सही समय पर सही कदम उठा सकें।

  • नाक से खून का बहना: यह सबसे मुख्य लक्षण है। खून नाक के एक नथुने से या दोनों से बाहर आ सकता है।
  • गले से खून का नीचे जाना: कई बार खून नाक से बाहर आने के बजाय गले से नीचे उतरता है, जिसे posterior epistaxis कहते हैं। इसे निगलने से मतली या उल्टी भी हो सकती है।
  • नाक में सूखापन या पपड़ी जमना: नाक के अंदर की झिल्ली सूखने या चोट लगने से पपड़ी बन सकती है, जिसके हटने पर खून आ सकता है।
  • नाक में खुजली या जलन: खून आने से पहले या उसके दौरान नाक के अंदर हल्की खुजली या जलन महसूस हो सकती है।
  • बार-बार छींक आना: कुछ लोगों को नकसीर आने से पहले या उसके साथ बार-बार छींकें आती हैं, खासकर अगर एलर्जी भी हो।
  • हल्का सिरदर्द: अगर नकसीर किसी अंदरूनी दबाव या साइनस की समस्या के कारण हो, तो हल्का सिरदर्द भी महसूस हो सकता है।
  • कमज़ोरी या चक्कर: ज़्यादा खून बहने पर शरीर में खून की कमी हो सकती है, जिससे कमज़ोरी, थकावट या चक्कर आ सकते हैं।
  • घबराहट: अचानक खून देखकर घबराहट होना स्वाभाविक है, जिससे दिल की धड़कन तेज़ हो सकती है।

नाक से खून आना / Nosebleed के कारण

नाक से खून आने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ बहुत आम हैं और कुछ दुर्लभ। मेरे अनुभव में, ज़्यादातर मामलों में यह कोई गंभीर समस्या नहीं होती, लेकिन बार-बार होने पर जांच ज़रूरी है।

  • अज्ञात कारण: ज़्यादातर मामलों में नकसीर का कोई स्पष्ट कारण नहीं मिल पाता। इसे प्राथमिक नकसीर कहते हैं और यह बच्चों और बुज़ुर्गों में ज़्यादा आम है।
  • चोट या आघात: नाक में उंगली डालना, नाक पर चोट लगना, या नाक में कोई बाहरी चीज़ चले जाना नकसीर का एक बहुत आम कारण है। बच्चों में यह सबसे ज़्यादा देखा जाता है।
  • खून पतला करने वाली दवाएं: Warfarin, rivaroxaban जैसी खून पतला करने वाली दवाएं लेने वाले मरीज़ों में नकसीर का जोखिम बढ़ जाता है। इन दवाओं के कारण खून का थक्का बनने में ज़्यादा समय लगता है।
  • NSAIDs और एस्पिरिन: दर्द निवारक दवाएं जैसे एस्पिरिन भी खून को पतला करती हैं, जिससे नकसीर आने की संभावना बढ़ जाती है।
  • शराब का सेवन: शराब पीने से खून का थक्का बनने का समय बढ़ सकता है, जिससे नकसीर आने पर खून को रोकना मुश्किल हो जाता है।
  • Hereditary Haemorrhagic Telangiectasia (HHT): यह एक आनुवंशिक बीमारी है जिसमें रक्त वाहिकाएं कमज़ोर हो जाती हैं, जिससे बार-बार और गंभीर नकसीर आती है। यह दुर्लभ है लेकिन महत्वपूर्ण है।
  • नाक के ट्यूमर: दुर्लभ मामलों में, नाक के अंदर कोई ट्यूमर या गांठ भी नकसीर का कारण बन सकती है। ऐसे में खून के साथ लगातार खून से सना हुआ डिस्चार्ज भी आ सकता है।
  • टॉपिकल नेज़ल स्प्रे: कुछ नेज़ल स्प्रे का गलत तरीके से इस्तेमाल करने या नोजल से नाक की झिल्ली को चोट लगने से भी हल्की नकसीर आ सकती है।
  • उच्च रक्तचाप: हालांकि उच्च रक्तचाप सीधे तौर पर नकसीर का कारण नहीं बनता, लेकिन नकसीर के दौरान रक्तचाप बढ़ा हुआ पाया जाता है, जो चिंता के कारण हो सकता है।

वाराणसी में इस समस्या के स्थानीय कारण

वाराणसी का मौसम और वातावरण भी नाक से खून आने की समस्या को प्रभावित कर सकता है।

  • धूल और प्रदूषण: वाराणसी में धूल और प्रदूषण का स्तर अक्सर ज़्यादा रहता है, खासकर गर्मियों में। यह नाक की अंदरूनी झिल्ली को सूखा और संवेदनशील बना देता है, जिससे खून आने की संभावना बढ़ जाती है।
  • शुष्क हवा: गर्मियों के महीनों में यहाँ की हवा बहुत शुष्क हो जाती है। शुष्क हवा नाक के अंदर की नमी को कम कर देती है, जिससे रक्त वाहिकाएं आसानी से फट सकती हैं।
  • घाटों पर धुआं और अगरबत्ती: गंगा घाटों पर होने वाली पूजा-पाठ और अगरबत्ती का धुआं भी नाक की झिल्ली को इरिटेट कर सकता है, जिससे कुछ लोगों को नकसीर की समस्या हो सकती है।
  • सर्दी का मौसम: सर्दियों में, ठंडी और शुष्क हवा के कारण भी नाक के अंदर की झिल्ली सूख जाती है, जिससे नकसीर के मामले बढ़ जाते हैं।

नाक से खून आना / Nosebleed और दूसरी बीमारियों में फ़र्क

कई बार मरीज़ नाक से खून आने को किसी और समस्या से जोड़ देते हैं, या कुछ अन्य नाक की समस्याओं को नकसीर समझ लेते हैं। सही इलाज के लिए यह समझना ज़रूरी है कि यह अन्य स्थितियों से कैसे अलग है।

नाक से खून आना आमतौर पर नाक के अंदर की रक्त वाहिकाओं से होता है, जबकि अन्य समस्याएं नाक में रुकावट, डिस्चार्ज या दर्द का कारण बनती हैं। यह समझना ज़रूरी है कि हर नाक की समस्या नकसीर नहीं होती।

Feature Epistaxis / Nosebleed nasal polyps deviated septum sinusitis
Main symptom नाक से खून बहना नाक बंद, सूंघने में दिक्कत एक तरफ की नाक बंद नाक बंद, चेहरे पर दर्द
Duration कुछ मिनट से घंटों तक लगातार, महीनों तक हमेशा बनी रहती है कुछ हफ़्तों से महीनों तक
Trigger चोट, सूखापन, दवाएं एलर्जी, सूजन जन्मजात या चोट इन्फेक्शन, एलर्जी
When to worry तेज़ खून, दवा लेने पर सांस लेने में दिक्कत लगातार नाक बंद तेज़ दर्द, बुखार

सही diagnosis के लिए ENT specialist से मिलें।

जांच और निदान

जब आप नाक से खून आने की शिकायत लेकर मेरे पास आते हैं, तो सबसे पहले मैं आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री पूछता हूँ। मैं जानना चाहता हूँ कि आपको कितनी बार नकसीर आती है, खून कितना आता है, और क्या आप कोई दवा ले रहे हैं।

इसके बाद, मैं आपकी नाक की जांच करता हूँ। इसे anterior rhinoscopy कहते हैं, जिसमें मैं एक छोटी सी टॉर्च और एक उपकरण का उपयोग करके नाक के अंदर देखता हूँ। मेरा मुख्य ध्यान Little’s area पर होता है, जो नाक के सामने वाले हिस्से में होता है, क्योंकि ज़्यादातर नकसीर यहीं से आती है।

अगर खून नाक के पिछले हिस्से से आ रहा हो, तो मुझे nasal endoscopy करनी पड़ सकती है। इसमें एक पतली दूरबीन से नाक के अंदर गहराई तक देखा जाता है ताकि खून के स्रोत का पता चल सके। कुछ मामलों में, अगर मुझे किसी अंदरूनी समस्या का संदेह हो, तो कुछ ब्लड टेस्ट भी करवाए जा सकते हैं, खासकर अगर आप खून पतला करने वाली दवाएं ले रहे हों। यह सब आपको सही इलाज देने के लिए ज़रूरी है।

इलाज के विकल्प

नाक से खून आने का इलाज उसके कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है। मेरा लक्ष्य हमेशा पहले खून को रोकना और फिर भविष्य में इसे रोकने के लिए कदम उठाना होता है।

डॉक्टर का इलाज

अगर घर पर प्राथमिक उपचार से खून नहीं रुकता, तो डॉक्टर कई तरीके अपना सकते हैं। सबसे पहले, मैं नाक के अंदर खून के स्रोत का पता लगाता हूँ। अगर खून नाक के सामने वाले हिस्से से आ रहा है और कोई स्पष्ट रक्त वाहिका दिख रही है, तो मैं silver nitrate cautery का उपयोग करके उस वाहिका को बंद कर सकता हूँ।

यह एक छोटी सी प्रक्रिया है जो अक्सर OPD में ही हो जाती है। अगर cautery काम नहीं करती या खून ज़्यादा आ रहा है, तो nasal packing की जा सकती है। इसमें नाक के अंदर एक विशेष पट्टी या स्पंज डाला जाता है जो खून पर दबाव डालकर उसे रोकता है। अगर खून नाक के पिछले हिस्से से आ रहा है,
तो posterior nasal packing की ज़रूरत पड़ सकती है, जो ज़्यादा गंभीर होती है। कुछ मामलों में, tranexamic acid जैसी दवाएं भी दी जा सकती हैं जो खून का थक्का बनने में मदद करती हैं।

सर्जरी कब?

सर्जरी की ज़रूरत तब पड़ती है जब नकसीर बहुत गंभीर हो, बार-बार आती हो, और अन्य तरीकों से नियंत्रित न हो पाए। अगर नाक के पिछले हिस्से से खून आ रहा हो और packing से भी न रुके, तो endoscopic sphenopalatine artery ligation (ESPAL) नामक सर्जरी की जा सकती है। इसमें दूरबीन का उपयोग करके उस रक्त वाहिका को बांध दिया जाता है जिससे खून आ रहा है।

यह बहुत प्रभावी तरीका है। कुछ दुर्लभ और बहुत गंभीर मामलों में, embolisation नामक प्रक्रिया भी की जा सकती है, जिसमें रक्त वाहिका को अंदर से बंद कर दिया जाता है। हालांकि, ज़्यादातर नकसीर के मामलों में सर्जरी की ज़रूरत नहीं पड़ती।

घर पर क्या करें, क्या न करें?

नाक से खून आने पर घर पर कुछ आसान उपाय अपनाकर इसे रोका जा सकता है, लेकिन कुछ गलतियाँ करने से बचना भी उतना ही ज़रूरी है।

क्या करें

  • आगे की ओर झुकें और नाक दबाएं: शांत होकर बैठें, सिर को थोड़ा आगे की ओर झुकाएं और अपनी नाक के नरम हिस्से (नथुनों के ठीक ऊपर) को 10-15 मिनट तक कसकर दबाएं। इससे खून गले में नहीं जाएगा और थक्का बनने में मदद मिलेगी।
  • खून थूक दें: मुंह में आने वाले खून को निगलने के बजाय थूक दें। खून निगलने से मतली या उल्टी हो सकती है।
  • बर्फ की सिकाई: नाक के पुल पर या गालों पर बर्फ का पैक रखने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं और खून बहना कम हो सकता है।
  • नाक में नमी बनाए रखें: अगर हवा शुष्क हो, तो humidifier का उपयोग करें। नाक के अंदर पेट्रोलियम जेली या डॉक्टर द्वारा बताई गई antiseptic nasal cream लगाने से भी सूखापन कम होता है।
  • आराम करें: खून रुकने के बाद कम से कम 24 घंटे तक नाक न झाड़ें, ज़ोर न लगाएं, और गर्म पेय पदार्थों से बचें।

क्या न करें

  • सिर पीछे न झुकाएं: सिर पीछे झुकाने से खून गले से नीचे चला जाता है, जिससे आप इसे निगल सकते हैं या यह फेफड़ों में जा सकता है।
  • नाक में टिश्यू पेपर न डालें: नाक में टिश्यू पेपर या रुई डालने से नाक की झिल्ली को और नुकसान हो सकता है और इसे निकालना मुश्किल हो सकता है।
  • नाक में उंगली न डालें: नाक में उंगली डालने से Little’s area पर चोट लग सकती है, जो नकसीर का सबसे आम कारण है।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं न रोकें: अगर आप खून पतला करने वाली दवाएं ले रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह के बिना उन्हें बंद न करें। इससे स्ट्रोक या दिल के दौरे का खतरा बढ़ सकता है।
  • बार-बार नकसीर को नज़रअंदाज़ न करें: अगर आपको बार-बार नकसीर आती है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। यह किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है जिसकी जांच ज़रूरी है।

बचाव

वाराणसी जैसे शहर में, जहाँ धूल, प्रदूषण और मौसम में बदलाव आम हैं, नाक से खून आने से बचाव के लिए कुछ ख़ास बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है।

  • नाक में नमी बनाए रखें: गर्मियों में जब हवा शुष्क होती है, तो नाक के अंदर की झिल्ली सूख जाती है। ऐसे में, घर में humidifier का उपयोग करें या नाक के अंदर हल्की पेट्रोलियम जेली लगाएं।
  • धूल और प्रदूषण से बचें: वाराणसी में धूल और प्रदूषण का स्तर अक्सर ज़्यादा रहता है। बाहर निकलते समय मास्क पहनें, खासकर जब हवा में धूल ज़्यादा हो।
  • नाक में उंगली न डालें: यह बच्चों और बड़ों दोनों में नकसीर का एक बहुत आम कारण है। इस आदत से बचें ताकि नाक की अंदरूनी झिल्ली को चोट न लगे।
  • एलर्जी का इलाज करें: अगर आपको एलर्जी है, तो उसका सही इलाज करवाएं। एलर्जी के कारण नाक में सूजन और खुजली हो सकती है, जिससे नकसीर का खतरा बढ़ जाता है।
  • पानी खूब पिएं: शरीर में पानी की कमी न होने दें। पर्याप्त पानी पीने से शरीर की झिल्लियाँ नम रहती हैं, जिसमें नाक की झिल्ली भी शामिल है।
  • नेज़ल स्प्रे का सही इस्तेमाल: अगर आप किसी नेज़ल स्प्रे का उपयोग करते हैं, तो उसे सही तरीके से इस्तेमाल करें ताकि नाक की झिल्ली को चोट न लगे।

अस्वीकरण

यह लेख सिर्फ शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह से डॉक्टर की सलाह, जांच या इलाज की जगह नहीं ले सकता। कोई भी दवाई या इलाज अपने डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद न करें।
यह आवाज़ आपकी नींद, एकाग्रता और रोज़मर्रा के कामों को प्रभावित कर सकती है।

ऑनलाइन परामर्श के लिए Dr. Prateek Porwal से संपर्क करें: 7393062200 (WhatsApp/Call)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

How can I prevent नाक से खून आना?

अपनी नाक के अंदरूनी हिस्से को saline nasal spray या पेट्रोलियम जेली की पतली परत लगाकर नम रखें। सूखे मौसम में humidifier का उपयोग करें। नाक में उँगली डालना बंद करें। नाक पर दबाव कम करने के लिए मुँह खोलकर छींकें। अगर आपको एलर्जी है, तो छींक कम करने के लिए उसका इलाज करवाएँ। अगर इन उपायों के बावजूद नाक से खून आना बंद नहीं होता है, तो अपने डॉक्टर से सलाह लें।

नाक से खून आना को घर पर कैसे रोकें?

सीधे बैठें और थोड़ा आगे झुकें (अपना सिर पीछे न झुकाएँ)। अपनी नाक के नरम हिस्से को अंगूठे और तर्जनी से 10-15 मिनट तक कसकर दबाएँ, बिना छोड़े। मुँह से साँस लें और नाक के पुल पर ठंडी पट्टी रखें। अगर 20 मिनट के बाद भी खून बहना बंद न हो, तो तुरंत नज़दीकी अस्पताल जाएँ।

What causes frequent नाक से खून आना?

नाक से खून आने के आम कारणों में सूखी हवा, नाक में उँगली डालना, बार-बार छींक आने वाली एलर्जी, हाई ब्लड प्रेशर, खून पतला करने वाली दवाएँ और डेविएटेड सेप्टम शामिल हैं। बच्चों में, नाक में उँगली डालना और सूखी हवा सबसे आम कारण हैं। बार-बार या ज़्यादा खून आने पर किसी ENT specialist से जाँच करवानी चाहिए ताकि किसी दुर्लभ कारण का पता लगाया जा सके।

When is नाक से खून आना serious?

अगर 20 मिनट तक दबाव डालने के बाद भी खून बहना बंद न हो, खून बहुत ज़्यादा आ रहा हो, आपको चक्कर या बेहोशी महसूस हो, सिर में चोट लगने के बाद खून आया हो, या नाक से बहुत बार खून आता हो, तो तुरंत डॉक्टर की मदद लें। खून पतला करने वाली दवाएँ लेने वाले मरीज़ों को भी नाक से खून आने पर तुरंत मेडिकल अटेंशन की ज़रूरत होती है।

मेरे बच्चे को लगभग हर हफ़्ते नाक से खून आना होता है। क्या यह सामान्य है?

बच्चों में हफ़्ते में एक बार नाक से खून आना आम है, खासकर सूखे मौसम में, और यह आमतौर पर नाक के सामने की तरफ़ एक छोटी रक्त वाहिका से होता है। हालाँकि, अगर नाक से खून बहुत बार आता है, ज़्यादा आता है, या दोनों नथुनों से आता है, तो किसी ENT specialist से सलाह लें। डॉक्टर एक त्वरित और दर्द रहित प्रक्रिया में रक्त वाहिका को कॉटराइज़ (सील) कर सकते हैं।

क्या उच्च रक्तचाप से नाक से खून आना हो सकता है?

अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर नाक से खून आने को ज़्यादा बार और रोकना मुश्किल बना सकता है, हालाँकि यह सीधे तौर पर नाक से खून आने का कारण कम ही बनता है। अगर आपको हाई BP है और नाक से खून आता है, तो अपना ब्लड प्रेशर चेक करवाएँ और उसे नियंत्रित करें। नाक से खून का इलाज करने वाले डॉक्टर को अपनी BP की दवाओं के बारे में हमेशा बताएँ।

अपने ENT specialist से ज़रूर मिलें।


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यह जानकारी शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। अपनी स्वास्थ्य समस्या के लिए हमेशा ENT विशेषज्ञ से मिलें।

Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB (ENT), CAMVD) | About | Prime ENT Center, Hardoi | ☎️ +91-7393062200

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Dr. Prateek Porwal
MBBS, DNB ENT, CAMVD — Vertigo & ENT Specialist

Founder, Prime ENT Center, Hardoi, UP. Inventor of the Bangalore Maneuver for BPPV. Only VNG + Stabilometry clinic in Central UP. Online consultations available across India — drprateekporwal.com · 7393062200

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