🩺 Docvani — हिंदी | Lucknow | लक्षण और पहचान
लेखक: डॉ. प्रतीक पोरवाल (Dr. Prateek Porwal), MBBS, DNB (ENT), CAMVD | अनुभव: 13+ वर्ष
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✅ Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB (ENT), CAMVD) द्वारा चिकित्सकीय समीक्षा — 2026-04-10 | अंतिम चिकित्सा समीक्षा: 2026-04-10
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खर्राटे आना क्यों होता है — लखनऊ
अगर रात को सोते समय आपके या आपके पार्टनर के खर्राटे इतनी तेज़ आते हैं कि आपकी नींद टूट जाती है, या फिर नींद में साँस रुकने जैसा महसूस होता है, तो समझ लीजिए कि यह सिर्फ एक छोटी सी आदत नहीं है। बल्कि, यह आपकी नींद की क्वालिटी, दिनभर की एनर्जी और रिश्तों पर भी बुरा असर डाल सकती है। मेरे clinic में लखनऊ से ऐसे कई मरीज़ आते हैं जो बताते हैं कि इस समस्या के कारण उन्हें दिन में थकान, चिड़चिड़ापन और काम में मन न लगने जैसी दिक्कतें आती हैं।
यह खर्राटे आना कभी-कभी Obstructive Sleep Apnea (OSA) जैसी गंभीर स्थिति का संकेत भी हो सकता है, जिसे स्लीप एपनिया भी कहते हैं।
अभी क्या करें?
- घर पर राहत: अगर आपको हल्के खर्राटे आते हैं, तो पीठ के बल सोने के बजाय करवट लेकर सोएं। अपने सिर को थोड़ा ऊंचा रखने के लिए एक अतिरिक्त तकिया इस्तेमाल करें।
- डॉक्टर को दिखाएं: यदि आपके खर्राटे बहुत तेज़ और लगातार आते हैं, या आपके पार्टनर ने नींद में आपकी साँस रुकते हुए देखी है, तो तुरंत ENT specialist से मिलें। दिन में बहुत ज़्यादा नींद आना या सुबह सिरदर्द होना भी डॉक्टर को दिखाने का संकेत है।
- तुरंत जाएं: अगर नींद में साँस रुकने के दौरान आपका शरीर नीला पड़ जाता है, या बच्चे में खर्राटों के साथ विकास रुक रहा है, या बच्चे को दिल से जुड़ी कोई गंभीर समस्या हो रही है, तो बिना देर किए इमरजेंसी में डॉक्टर के पास जाएं। ये गंभीर स्लीप एपनिया के लक्षण हो सकते हैं।
तुरंत डॉक्टर के पास कब जाएं?
कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये गंभीर स्लीप एपनिया के संकेत हो सकते हैं। इन स्थितियों में तुरंत किसी ENT specialist से मिलना बहुत ज़रूरी है।

- साँस रुकना और नीला पड़ना: अगर आपके पार्टनर ने देखा है कि सोते समय आपकी साँस लंबे समय तक रुक जाती है और आपके होंठ या त्वचा नीली पड़ने लगती है, तो यह एक बहुत ही गंभीर स्थिति है। यह शरीर में ऑक्सीजन की भारी कमी का संकेत है।
- बच्चों में विकास रुकना: यदि कोई बच्चा तेज़ खर्राटे लेता है और उसके साथ उसका शारीरिक विकास ठीक से नहीं हो रहा है, या उसका वज़न नहीं बढ़ रहा है, तो यह स्लीप एपनिया के कारण हो सकता है। बच्चों में यह उनके विकास और स्वास्थ्य पर सीधा असर डालता है।
- दिल की समस्या: कुछ बच्चों में लंबे समय से चले आ रहे गंभीर स्लीप एपनिया के कारण दिल से जुड़ी गंभीर समस्या विकसित हो सकती है। अगर बच्चे में ऐसे कोई लक्षण दिखें, तो तत्काल मेडिकल सहायता लें।
खर्राटे आना & Sleep Apnea के लक्षण
खर्राटे आना और स्लीप एपनिया दोनों ही नींद से जुड़ी साँस लेने की समस्याएँ हैं, जिनके कई लक्षण हो सकते हैं। इन लक्षणों को पहचानना सही इलाज के लिए बहुत ज़रूरी है।
- आदत वाले खर्राटे: रात को सोते समय लगातार और तेज़ आवाज़ में खर्राटे आना सबसे आम लक्षण है। ये खर्राटे इतने तेज़ हो सकते हैं कि आपके साथ सोने वाले व्यक्ति की नींद खराब हो जाए।
- नींद में साँस रुकना: आपके पार्टनर या परिवार के किसी सदस्य ने देखा होगा कि सोते समय आपकी साँस कुछ सेकंड के लिए पूरी तरह रुक जाती है। इसके बाद अक्सर एक तेज़ खर्राटे या हांफने की आवाज़ आती है।
- दिन में ज़्यादा नींद आना: रात को पूरी नींद लेने के बाद भी दिनभर थकान और नींद महसूस होना स्लीप एपनिया का एक बड़ा संकेत है। इससे काम पर या गाड़ी चलाते समय ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल हो सकती है।
- सुबह सिरदर्द: अकसर सुबह उठते ही सिर में दर्द महसूस होना भी स्लीप एपनिया का एक लक्षण हो सकता है। यह रातभर ऑक्सीजन की कमी के कारण होता है।
- बच्चों में मुँह से साँस लेना: बच्चे अगर लगातार मुँह खोलकर साँस लेते हैं, खासकर सोते समय, तो यह उनके वायुमार्ग में रुकावट का संकेत हो सकता है। इसे ‘adenoid facies’ भी कहते हैं, जिसमें बच्चे के चेहरे का आकार थोड़ा बदल जाता है।
- बच्चों में एकाग्रता की कमी: स्लीप एपनिया से पीड़ित बच्चों को स्कूल में ध्यान लगाने में दिक्कत हो सकती है और उनके व्यवहार में बदलाव आ सकता है। वे चिड़चिड़े या हाइपरएक्टिव हो सकते हैं।
- बच्चों में बिस्तर गीला करना: कुछ बच्चों में स्लीप एपनिया के कारण रात को बिस्तर गीला करने की समस्या भी देखी जाती है। यह नींद की खराब गुणवत्ता से जुड़ा हो सकता है।
खर्राटे आना & Sleep Apnea के कारण
खर्राटे और स्लीप एपनिया तब होते हैं जब सोते समय गले का वायुमार्ग संकरा हो जाता है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जो बच्चों और बड़ों में अलग-अलग होते हैं।
- ** Adenotonsillar hypertrophy: बच्चों में खर्राटों और स्लीप एपनिया का सबसे आम कारण टॉन्सिल और एडेनोइड्स का बढ़ जाना है। ये गले के पिछले हिस्से में होते हैं और जब ये बड़े हो जाते हैं, तो साँस लेने के रास्ते को ब्लॉक कर देते हैं।
- ** मोटापा: वयस्कों में मोटापे के कारण गले और गर्दन के आसपास ज़्यादा वसा जमा हो जाती है। यह वसा वायुमार्ग को संकरा कर देती है। साथ ही, यह गले की मांसपेशियों की काम करने की क्षमता को भी कम कर देती है, जिससे खर्राटे और स्लीप एपनिया की संभावना बढ़ जाती है। इसका कारण बड़ी जीभ, चेहरे की हड्डियों का कम विकसित होना और मांसपेशियों में ढीलापन हो सकता है।
- ** Craniofacial abnormalities: कुछ लोगों में जन्म से ही चेहरे और खोपड़ी की संरचना में असामान्यताएं होती हैं, जैसे CHARGE syndrome या craniosynostosis। ये संरचनात्मक असामान्यताएं वायुमार्ग को संकरा कर सकती हैं।
- एलर्जिक राइनाइटिस या नाक में रुकावट: नाक में एलर्जी या नाक की हड्डी टेढ़ी होना (DNS) जैसी समस्याएँ नाक से साँस लेने में बाधा डालती हैं। इससे व्यक्ति मुँह से साँस लेने लगता है, जिससे गले का वायुमार्ग और संकरा हो जाता है और खर्राटे बढ़ जाते हैं।
खर्राटे आने में इस समस्या के स्थानीय कारण
लखनऊ में रहने वाले लोगों को कुछ खास स्थानीय कारणों से खर्राटे और स्लीप एपनिया की समस्या ज़्यादा हो सकती है।
- वायु प्रदूषण: लखनऊ में सालभर वायु प्रदूषण का स्तर काफी ऊंचा रहता है, खासकर सर्दियों में जब पराली जलाने और धुंध के कारण AQI 300+ तक पहुंच जाता है। यह प्रदूषण नाक और गले की अंदरूनी परत में सूजन पैदा करता है, जिससे वायुमार्ग संकरा हो जाता है।
- सर्दियों की धुंध: दिसंबर और जनवरी में पड़ने वाली घनी धुंध श्वसन संबंधी समस्याओं को बढ़ाती है। यह नाक और गले में जमाव पैदा करती है, जिससे खर्राटे और स्लीप एपनिया के लक्षण और भी बदतर हो जाते हैं।
- धूल और एलर्जी: शहर में चल रहे निर्माण कार्य और धूल के कारण एलर्जी के मामले बढ़ जाते हैं। धूल के कण नाक और गले में एलर्जी पैदा करके सूजन और रुकावट का कारण बनते हैं, जिससे सोते वक्त खर्राटे आने लगते हैं।
- जीवनशैली: लखनऊ में कुछ लोगों की जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि की कमी और खानपान की आदतों के कारण मोटापा बढ़ रहा है। मोटापा स्लीप एपनिया का एक प्रमुख कारण है, क्योंकि यह गले के वायुमार्ग को संकरा कर देता है।
खर्राटे आना & Sleep Apnea और दूसरी बीमारियों में फ़र्क
कई बार मरीज़ खर्राटों को किसी और समस्या से जोड़कर देखते हैं, या उन्हें लगता है कि यह सिर्फ एक सामान्य बात है। लेकिन खर्राटे और स्लीप एपनिया को कुछ अन्य स्थितियों से अलग समझना ज़रूरी है, क्योंकि हर समस्या का इलाज अलग होता है।
| Feature | खर्राटे आना | बच्चों में स्लीप एपनिया | नाक की हड्डी टेढ़ी होना | नाक के पॉलिप्स |
|---|---|---|---|---|
| मुख्य लक्षण | सोते समय तेज़ आवाज़ | नींद में साँस रुकना, दिन में थकान | एक तरफ से नाक बंद | नाक से पानी, गंध न आना |
| अवधि | नींद के दौरान | लगातार, हर रात | स्थायी | धीरे-धीरे बढ़ता है |
| ट्रिगर | पीठ के बल सोना, शराब | बढ़े हुए टॉन्सिल/एडेनोइड्स | जन्मजात या चोट | एलर्जी, सूजन |
| कब चिंता करें | दिन में थकान, साँस रुकना | विकास रुकना, व्यवहार में बदलाव | लगातार नाक बंद | साँस लेने में गंभीर दिक्कत |
सही diaganosis के लिए ENT specialist से मिलें।
जांच और निदान
जब आप खर्राटों या स्लीप एपनिया की समस्या लेकर मेरे पास आते हैं, तो सबसे पहले मैं आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री लेता हूँ। मैं आपसे पूछता हूँ कि आपके खर्राटे कब से आ रहे हैं, उनकी तीव्रता क्या है, और क्या दिन में आपको नींद आती है या सुबह सिरदर्द होता है।
इसके बाद, मैं नाक और गले की पूरी जांच करता हूँ। नाक की दूरबीन से जांच करके मैं देखता हूँ कि नाक में कोई रुकावट तो नहीं है, जैसे नाक की हड्डी टेढ़ी होना (DNS) या नाक के मांस का बढ़ना। गले की जांच से टॉन्सिल और एडेनोइड्स के आकार का पता चलता है, खासकर बच्चों में।
स्लीप एपनिया का पता लगाने के लिए सबसे सटीक जांच Polysomnography (PSG) है, जिसे नींद की जांच भी कहते हैं। इस जांच में आप रातभर एक स्लीप लैब में सोते हैं, जहाँ आपकी साँस लेने की गति, ऑक्सीजन का स्तर, दिल की धड़कन, और मस्तिष्क की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाता है। यह हमें Apnea-Hypopnea Index (AHI) देता है, जिससे स्लीप एपनिया की गंभीरता का पता चलता है।
बच्चों में AHI >1 को महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर PSG उपलब्ध न हो, तो Oximetry भी एक विकल्प है, जो ऑक्सीजन के स्तर को मापता है। इन सभी जांचों के बाद ही मैं आपको सही इलाज बता पाता हूँ।
इलाज के विकल्प
खर्राटे और स्लीप एपनिया का इलाज इसके कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है। कई बार जीवनशैली में बदलाव और कुछ मेडिकल तरीकों से आराम मिल सकता है, और कुछ मामलों में सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है।
डॉक्टर का इलाज
डॉक्टर के इलाज में सबसे पहले जीवनशैली में बदलाव की सलाह दी जाती है। अगर आपका वज़न ज़्यादा है, तो वज़न कम करना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यह गले के वायुमार्ग पर दबाव कम करता है। इसके साथ ही, आपका डॉक्टर नाक की रुकावट को कम करने के लिए नाक की स्प्रे दे सकते हैं, खासकर अगर आपको एलर्जिक राइनाइटिस की समस्या है।
कुछ मरीज़ों के लिए, Continuous Positive Airway Pressure (CPAP) मशीन सबसे प्रभावी इलाज है। यह मशीन सोते समय एक मास्क के ज़रिए लगातार हवा का दबाव बनाए रखती है, जिससे वायुमार्ग खुला रहता है और साँस रुकने की समस्या नहीं होती। CPAP मशीन का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करें।
सर्जरी कब?
सर्जरी का विचार तब किया जाता है जब अन्य इलाज के तरीकों से आराम नहीं मिलता या समस्या बहुत गंभीर होती है। बच्चों में, बढ़े हुए टॉन्सिल और एडेनोइड्स को हटाने के लिए सर्जरी अक्सर पहला और सबसे प्रभावी इलाज होता है। वयस्कों में, अगर नाक की हड्डी टेढ़ी होने (DNS) या नाक के मांस बढ़ने के कारण रुकावट है, तो Septoplasty या turbinate reduction जैसी नाक की सर्जरी पर विचार किया जा सकता है।
ये सर्जरी वायुमार्ग को खोलने में मदद करती हैं, जिससे खर्राटे और स्लीप एपनिया के लक्षण कम हो सकते हैं।
घर पर क्या करें, क्या न करें?
खर्राटों और स्लीप एपनिया को मैनेज करने में घर पर कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत मददगार हो सकता है। लेकिन कुछ ऐसी चीज़ें भी हैं जिनसे बचना चाहिए।
क्या करें
- वज़न कम करें: अगर आपका वज़न ज़्यादा है, तो वज़न कम करने की कोशिश करें। मोटापा गले के आसपास वसा जमा करता है, जिससे वायुमार्ग संकरा हो जाता है। थोड़ा सा वज़न कम करने से भी बहुत फ़र्क पड़ सकता है।
- करवट लेकर सोएं: पीठ के बल सोने से जीभ और गले के मुलायम ऊतक पीछे की ओर गिरकर वायुमार्ग को ब्लॉक कर सकते हैं। करवट लेकर सोने से यह समस्या कम होती है।
- सिर को ऊंचा रखें: अपने बिस्तर के सिरहाने को थोड़ा ऊंचा करें या एक अतिरिक्त तकिया इस्तेमाल करें। इससे गुरुत्वाकर्षण गले के ऊतकों को नीचे गिरने से रोकने में मदद करता है।
- नाक की भीड़ का इलाज करें: अगर आपको एलर्जी या सर्दी के कारण नाक बंद रहती है, तो नाक की स्प्रे या सलाइन रिंस का उपयोग करें। नाक साफ होने से मुँह से साँस लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
क्या न करें
-
दिन में नींद आने या साँस रुकने को नज़रअंदाज़ न करें: अगर आपको दिन में बहुत ज़्यादा नींद आती है या आपके पार्टनर ने नींद में आपकी साँस रुकते हुए देखी है, तो इसे सामान्य मानकर नज़रअंदाज़ न करें। यह स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है।
ज़्यादा नींद आने पर गाड़ी न चलाएं: अगर आपको दिन में बहुत ज़्यादा नींद आती है, तो गाड़ी चलाने से बचें। स्लीप एपनिया के मरीज़ों में सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
WHO और AAO-HNS की guidelines के अनुसार, इस तरह के लक्षणों में ENT specialist से जाँच कराना ज़रूरी है।
बचाव
खर्राटों और स्लीप एपनिया से बचाव के लिए लखनऊ के स्थानीय वातावरण और जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं।
- वायु प्रदूषण से बचाव: लखनऊ में प्रदूषण का स्तर अक्सर ऊंचा रहता है। घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें, खासकर सर्दियों की धुंध और धूल भरे मौसम में। घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करने पर भी विचार करें, ताकि नाक और गले में सूजन कम हो।
- एलर्जी का प्रबंधन: अगर आपको धूल या पराग से एलर्जी है, तो अपने डॉक्टर से सलाह लेकर एलर्जी की दवाइयाँ या नाक की स्प्रे का नियमित उपयोग करें। लखनऊ में धूल और पराली जलाने से होने वाला धुआँ एलर्जी को बढ़ा सकता है।
- स्वस्थ वज़न बनाए रखें: संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से स्वस्थ वज़न बनाए रखें। लखनऊ में कई लोग आरामदायक जीवनशैली जीते हैं, जिससे वज़न बढ़ने का खतरा रहता है, जो खर्राटों का एक प्रमुख कारण है।
- नियमित रूप से नाक साफ करें: सर्दियों में या धूल भरे मौसम में सलाइन नेज़ल रिंस का उपयोग करके अपनी नाक को साफ रखें। यह नाक में जमाव और सूजन को कम करने में मदद करता है, जिससे रात को साँस लेना आसान होता है।
- सोने की आदतों में सुधार: सोने का एक निश्चित समय तय करें और हर रात पर्याप्त नींद लें। अनियमित नींद की आदतें और देर रात तक जागना भी खर्राटों को बढ़ा सकता है।
अस्वीकरण
यह लेख सिर्फ शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह से डॉक्टर की सलाह, जांच या इलाज की जगह नहीं ले सकता। कोई भी दवाई या इलाज अपने डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद न करें।
ऑनलाइन परामर्श के लिए Dr. Prateek Porwal से संपर्क करें: 7393062200 (WhatsApp/Call)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मेरा बच्चा जोर से खर्राटे लेता है। क्या मुझे चिंता करनी चाहिए?
बच्चों को नियमित रूप से खर्राटे नहीं लेने चाहिए। बच्चों में लगातार तेज खर्राटे आमतौर पर बढ़े हुए एडेनोइड्स या टॉन्सिल के कारण होते हैं और इससे खराब नींद, बिस्तर गीला करना, व्यवहार संबंधी समस्याएं और स्कूल में खराब प्रदर्शन हो सकता है। अगर आपका बच्चा ज्यादातर रातों में खर्राटे लेता है, मुंह से सांस लेता है, या उसकी नींद बेचैन रहती है, तो किसी ENT स्पेशलिस्ट को दिखाएं।
क्या खर्राटों को रोकने के लिए कोई सर्जरी है?
हाँ, कारण के आधार पर कई सर्जरी के विकल्प मौजूद हैं। इनमें नेज़ल सर्जरी (जैसे septoplasty, turbinate reduction), tonsillectomy, adenoidectomy, या palate procedures शामिल हैं। सर्जरी पर तब विचार किया जाता है जब जीवनशैली में बदलाव और मेडिकल इलाज से मदद नहीं मिली हो। आपके ENT स्पेशलिस्ट पूरी जांच के बाद सही प्रक्रिया की सिफारिश करेंगे।
क्या वजन कम करने से खर्राटों का इलाज हो सकता है?
अधिक वजन वाले व्यक्तियों में वजन कम करने से खर्राटों को काफी हद तक कम या खत्म किया जा सकता है। गर्दन के आसपास वसा जमा होने से वायुमार्ग संकरा हो जाता है और खर्राटे बिगड़ जाते हैं; 5-10 किलो वजन कम करने से भी ध्यान देने योग्य अंतर आ सकता है। हालांकि, पतले लोग भी डेविएटेड सेप्टम या बढ़े हुए टॉन्सिल जैसे संरचनात्मक कारणों से खर्राटे ले सकते हैं, जिनके लिए अलग इलाज की जरूरत होती है।
Is खर्राटे आना dangerous?
साँस रुकने के बिना साधारण खर्राटे आमतौर पर खतरनाक नहीं होते, हालांकि वे आपके पार्टनर की नींद खराब कर सकते हैं। लेकिन, नींद के दौरान साँस रुकने, हाँफने या घुटन के साथ ज़ोरदार खर्राटे obstructive sleep apnea (OSA) का संकेत हो सकते हैं, जो गंभीर है और हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक से जुड़ा है। अगर आपके परिवार को लगता है कि आप नींद में साँस लेना बंद कर देते हैं, तो डॉक्टर को दिखाएँ।
What causes खर्राटे आना?
खर्राटे तब आते हैं जब नींद के दौरान नाक और गले से हवा स्वतंत्र रूप से नहीं बह पाती, जिससे आसपास के ऊतक कंपन करते हैं। आम कारणों में नाक में रुकावट, बढ़े हुए टॉन्सिल या adenoids, मोटापा, सोने से पहले शराब पीना और पीठ के बल सोना शामिल हैं। एक ENT specialist सटीक कारण की पहचान कर सकते हैं।
क्या मैं सर्जरी के बिना खर्राटे रोक सकता हूँ?
पीठ के बल सोने के बजाय करवट लेकर सोने की कोशिश करें। अगर आपका वज़न ज़्यादा है, तो उसे कम करें। इसके अलावा, सोने से 3-4 घंटे पहले शराब पीने से बचें, नाक की एलर्जी का इलाज करवाएँ और अपनी नींद का एक नियमित शेड्यूल बनाएँ। अगर नाक में रुकावट कारण है तो nasal strips या saline spray मदद कर सकते हैं। अगर इन बदलावों के बावजूद खर्राटे आते रहते हैं, तो एक ENT specialist से सलाह लें।
अपने ENT specialist से ज़रूर मिलें।
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