चक्कर आना: लखनऊ में घर पर सुरक्षित देखभाल और आसान उपाय

🩺 Docvani — Indian Vernacular Health Education

Language: हिंदी | City: Lucknow
Chapter 3 of 9: घर पर क्या करें (Safe Home Care)

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भारत में 90% से ज़्यादा मेडिकल जानकारी अंग्रेज़ी में है। मैंने Docvani बनाया है ताकि मेरा क्लीनिकल अनुभव सरल हिंदी में हर मरीज़ तक पहुँचे।

✍️ AI draft — Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB (ENT), CAMVD) द्वारा शब्द-दर-शब्द मेडिकल ऑडिट (NMC: 82487) — 2026-03-19

चक्कर आना - चक्कर आना

जब अचानक सब कुछ घूमने लगता है, सिर में चक्कर आने लगते हैं, या धरती हिलती हुई लगती है, तो डर लगना बिल्कुल स्वाभाविक है। मेरे Prime ENT Center में हर हफ्ते ऐसे कई मरीज़ आते हैं जो इस चक्कर आने की समस्या से जूझ रहे होते हैं। मैं समझता हूँ कि जब संतुलन खोना शुरू होता है, तो कितनी घबराहट होती है। लखनऊ और आसपास के इलाकों जैसे हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, बाराबंकी और कानपुर से भी कई लोग इस परेशानी के लिए सलाह लेने आते हैं। अगर आपको चक्कर आ रहे हैं, तो सबसे पहले शांत होकर बैठ जाएं या लेट जाएं ताकि गिरने का खतरा न हो। अपनी आँखें बंद करें और किसी भी तरह के अचानक सिर हिलाने से बचें।

चक्कर आने पर घर पर सुरक्षित उपाय

जब आपको चक्कर आने लगें, तो सबसे पहले घबराना नहीं चाहिए। कुछ आसान और सुरक्षित तरीके हैं जिनसे आप घर पर ही तुरंत आराम पा सकते हैं और खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। ये उपाय आपको डॉक्टर के पास जाने से पहले कुछ राहत दे सकते हैं, पर ये किसी भी तरह से डॉक्टर की जांच या इलाज का विकल्प नहीं हैं।

  • तुरंत लेट जाएं और आराम करें: अगर आपको अचानक सिर घूमना या चक्कर आने जैसा महसूस हो, तो तुरंत वहीं लेट जाएं जहां आप हैं। कोशिश करें कि आपका सिर थोड़ा ऊंचा रहे, इसके लिए आप एक या दो तकिए का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके कान के अंदरूनी हिस्से पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और चक्कर की तीव्रता कुछ हद तक घट सकती है। यह आपको गिरने और चोट लगने से भी बचाएगा, जो चक्कर आने पर सबसे बड़ा खतरा होता है।

    शांत और अंधेरे कमरे में रहें: जब चक्कर आ रहे हों, तो रोशनी और शोर से बचना चाहिए। एक शांत, अंधेरे कमरे में लेटने से आपके दिमाग को आराम मिलता है और बाहरी उत्तेजनाएं कम होती हैं, जिससे चक्कर की भावना थोड़ी कम हो सकती है। तेज रोशनी या बहुत ज्यादा आवाज़ें आपके लक्षणों को और बढ़ा सकती हैं, इसलिए इनसे दूर रहना ही बेहतर है।

    शरीर में पानी की कमी न होने दें: पानी की कमी भी कभी-कभी चक्कर आने या सिर भारी लगने का कारण बन सकती है, खासकर अगर आपको उल्टी या दस्त हुए हों। इसलिए, खूब सारा पानी पिएं। आप नींबू पानी, नारियल पानी या ORS (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) भी ले सकते हैं। यह आपके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा और आपको हल्का महसूस होने से बचाएगा।

    अचानक सिर हिलाने से बचें: चक्कर आने पर सबसे बड़ी गलती लोग यह करते हैं कि वे अचानक उठते हैं या सिर को तेज़ी से हिलाते हैं। ऐसा करने से कान के अंदरूनी हिस्से में मौजूद तरल पदार्थ और otolith crystals और ज़्यादा हिल जाते हैं, जिससे चक्कर और तेज़ हो जाते हैं। धीरे-धीरे उठें और बैठें, और सिर को बहुत आराम से हिलाएं। किसी भी काम को करने में जल्दबाजी न करें।

    किसी एक स्थिर बिंदु पर ध्यान केंद्रित करें: जब आपको चक्कर आ रहे हों और आप लेटे हुए हों, तो अपनी आँखों को कमरे में किसी एक स्थिर चीज़ पर टिकाने की कोशिश करें। यह आपके दिमाग को संतुलन बनाने में मदद कर सकता है और आँखों के आगे अंधेरा छाने या सिर घूमने की भावना को थोड़ा कम कर सकता है। यह एक तरह से आपके vestibular system को शांत करने में मदद करता है।

    डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं समय पर लें: अगर आपके डॉक्टर ने पहले से ही आपको चक्कर या उल्टी रोकने के लिए कोई दवा दी है, तो उसे समय पर लें। यह दवाएं लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं। लेकिन, बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी नई दवा शुरू न करें।

    खतरनाक घरेलू नुस्खे – ये गलतियाँ बिल्कुल न करें

    मेरे clinic में अक्सर ऐसे मरीज़ आते हैं जो चक्कर आने या कान से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए कुछ ऐसे घरेलू उपाय अपना लेते हैं जो फायदे की बजाय नुकसान ज़्यादा करते हैं। मैं समझता हूँ कि जब परेशानी होती है, तो लोग तुरंत राहत पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं, पर कुछ चीज़ें हैं जिनसे आपको बिल्कुल बचना चाहिए।

    • कान में तेल या कोई भी तरल पदार्थ डालना: यह सबसे आम और सबसे खतरनाक गलतियों में से एक है। कई लोग चक्कर आने पर या कान दर्द में सरसों का तेल, लहसुन का रस, प्याज का रस या कोई भी अन्य तेल कान में डाल लेते हैं। यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है कि इससे आराम मिलेगा। अगर आपके कान के पर्दे में छोटा सा भी छेद है (जो आपको पता नहीं होता), तो यह तेल या तरल पदार्थ अंदर जाकर गंभीर इन्फेक्शन पैदा कर सकता है। इससे कान में फंगल इन्फेक्शन भी हो सकता है, जिससे दर्द और बढ़ सकता है और सुनने में भी दिक्कत आ सकती है। मेरी मानिए तो कान में कुछ भी डालने से पहले हमेशा एक ENT specialist से जांच करवा लें।

      कान की सफाई के लिए नुकीली चीज़ों का इस्तेमाल: कुछ लोग कान में जमा वैक्स या गंदगी निकालने के लिए माचिस की तीली, हेयरपिन, चाबी या किसी भी नुकीली चीज़ का इस्तेमाल करते हैं। यह बेहद खतरनाक है। इससे आपके कान का पर्दा फट सकता है, कान की अंदरूनी त्वचा छिल सकती है, या वैक्स और ज़्यादा अंदर धकेल सकता है। इससे इन्फेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। कान की सफाई हमेशा किसी प्रशिक्षित डॉक्टर या ENT specialist से ही करवानी चाहिए, जो microsuction जैसी सुरक्षित तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं।

      कान की कैंडलिंग: यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक खोखली मोमबत्ती को कान में रखकर जलाया जाता है, यह सोचकर कि यह कान से वैक्स और गंदगी को बाहर निकाल लेगी। सच कहूँ तो, कान की कैंडलिंग का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और यह बहुत खतरनाक हो सकती है। इससे कान में जलने का खतरा होता है, मोम कान के अंदर टपक सकता है, और यह वैक्स को बाहर निकालने की बजाय और अंदर धकेल सकता है। इससे कान के पर्दे को भी नुकसान पहुँच सकता है।

      बिना डॉक्टर की सलाह के केमिस्ट से दवाइयां लेना: जब चक्कर आते हैं, तो कई लोग तुरंत केमिस्ट के पास जाकर चक्कर या उल्टी रोकने वाली दवाइयां ले लेते हैं। बिना सही जांच के दवाइयां लेना खतरनाक हो सकता है। चक्कर आने के कई कारण होते हैं, और हर कारण का इलाज अलग होता है। गलत दवा लेने से आपके लक्षण छिप सकते हैं, जिससे डॉक्टर को सही निदान करने में मुश्किल हो सकती है। कुछ दवाएं साइड इफेक्ट्स भी पैदा कर सकती हैं। इसलिए, हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही दवा लें।

      अचानक और तेज़ी से सिर हिलाने वाले व्यायाम करना: कुछ लोग इंटरनेट पर देखकर तेज़ी से सिर हिलाने वाले व्यायाम करने लगते हैं, यह सोचकर कि इससे चक्कर ठीक हो जाएंगे। अगर आपको BPPV (Benign Paroxysmal Positional चक्कर आना) है, तो कुछ खास maneuvers जैसे Epley Maneuver या Semont Maneuver डॉक्टर की देखरेख में ही किए जाने चाहिए। गलत तरीके से किए गए व्यायाम आपके otolith crystals को और ज़्यादा गलत जगह पर धकेल सकते हैं, जिससे चक्कर और बढ़ सकते हैं।

      डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

      चक्कर आने की समस्या को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह सिर्फ एक मामूली असंतुलन हो सकता है, या कभी-कभी किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी। इसलिए, यह जानना बहुत ज़रूरी है कि कब आपको घर पर इंतज़ार करना चाहिए और कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

      • अगर 2-3 दिन में आराम न मिले: अगर आपको हल्के चक्कर आ रहे हैं और आपने घर पर बताए गए सुरक्षित उपाय अपनाए हैं, लेकिन 2-3 दिनों के भीतर भी आपको कोई खास आराम नहीं मिल रहा है, तो आपको एक ENT specialist से मिलना चाहिए। यह संकेत हो सकता है कि समस्या अपने आप ठीक नहीं हो रही है और उसे सही जांच और इलाज की ज़रूरत है।

        अगर चक्कर बार-बार आएं: यदि आपको बार-बार चक्कर आते हैं, भले ही वे कुछ सेकंड के लिए ही क्यों न हों, तो भी आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए। बार-बार चक्कर आना BPPV या Meniere’s disease जैसी स्थितियों का संकेत हो सकता है, जिनके लिए विशेष इलाज की ज़रूरत होती है।

        अगर चक्कर के साथ ये ‘रेड फ्लैग’ लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं: ये लक्षण बहुत गंभीर हो सकते हैं और इन्हें कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। अगर आपको चक्कर के साथ इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो बिना एक पल की देरी किए तुरंत इमरजेंसी में जाएं या डॉक्टर से संपर्क करें:

        इन ‘रेड फ्लैग’ लक्षणों का मतलब है कि चक्कर का कारण कान की बजाय दिमाग से जुड़ा हो सकता है, जैसे कि स्ट्रोक। ऐसे में तुरंत मेडिकल सहायता लेना जान बचा सकता है।

        केमिस्ट बनाम डॉक्टर: कब किससे सलाह लें?

        जब आपको चक्कर आते हैं या कोई और स्वास्थ्य समस्या होती है, तो कई बार लोग असमंजस में पड़ जाते हैं कि पहले केमिस्ट के पास जाएं या सीधे डॉक्टर के पास। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि केमिस्ट और डॉक्टर की भूमिकाएं अलग-अलग होती हैं।

        केमिस्ट से कब सलाह ले सकते हैं:
        केमिस्ट आपको कुछ सामान्य ओवर-द-काउंटर (OTC) दवाएं दे सकते हैं, जैसे कि हल्के दर्द निवारक या ORS (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) अगर आपको पानी की कमी महसूस हो रही हो। अगर डॉक्टर ने आपको पहले से कोई दवा बताई है और आप उसे दोबारा लेना चाहते हैं, तो केमिस्ट आपको वह दवा दे सकते हैं। वे आपको कुछ सामान्य स्वास्थ्य सलाह भी दे सकते हैं, जैसे कि खूब पानी पीना या आराम करना।

        डॉक्टर से कब मिलना ज़रूरी है:
        चक्कर आने की स्थिति में, डॉक्टर से मिलना हमेशा बेहतर होता है। चक्कर आना एक लक्षण है, बीमारी नहीं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ गंभीर भी हो सकते हैं। एक ENT specialist या न्यूरोलॉजिस्ट ही सही जांच करके चक्कर के असली कारण का पता लगा सकते हैं। वे आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री लेंगे, शारीरिक जांच करेंगे, और ज़रूरत पड़ने पर VNG, MRI या CT scan जैसे टेस्ट भी करवा सकते हैं। बिना सही निदान के केमिस्ट से ली गई दवाएं सिर्फ लक्षणों को दबा सकती हैं, लेकिन बीमारी का इलाज नहीं कर सकतीं। गलत दवाएं लेने से समस्या और बिगड़ भी सकती है या किसी गंभीर बीमारी के लक्षणों को छिपा सकती है।

        मेरी सलाह यही है कि चक्कर आने पर, खासकर अगर वे बार-बार आ रहे हों या उनके साथ कोई अन्य गंभीर लक्षण हो, तो हमेशा एक योग्य डॉक्टर से ही सलाह लें।

        लखनऊ के मरीज़ों के लिए खास नोट

        लखनऊ एक बड़ा शहर है और यहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की कोई कमी नहीं है। फिर भी, कभी-कभी सही ENT specialist तक पहुँचने में समय लग सकता है, खासकर अगर आप लखनऊ के आसपास के छोटे शहरों जैसे हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, बाराबंकी या कानपुर से आ रहे हों।

        अगर आपको चक्कर आने की समस्या है और आप लखनऊ या आसपास के इलाकों में रहते हैं, तो एक ENT specialist से सलाह लेना बहुत ज़रूरी है। अगर आपके क्षेत्र में तुरंत ENT specialist उपलब्ध नहीं हैं, तो आप अपने नज़दीकी सामान्य चिकित्सक से मिल सकते हैं और उनसे ENT specialist के लिए रेफरल ले सकते हैं। वे आपको सही दिशा दिखा सकते हैं। लखनऊ में प्रदूषण का स्तर, खासकर सर्दियों में, काफी ज़्यादा रहता है, और धूल-मिट्टी भी एक आम समस्या है। हालांकि इसका सीधा संबंध चक्कर से नहीं है, पर यह आपके स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इसलिए, अपनी सेहत का ध्यान रखना और सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना और भी ज़रूरी हो जाता है।

        अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

        क्या चक्कर आने का संबंध ब्लड प्रेशर से है?

        मैं समझता हूँ कि यह एक आम सवाल है। हाँ, कम ब्लड प्रेशर, खासकर जब आप तेज़ी से खड़े होते हैं (जिसे orthostatic hypotension कहते हैं), तो आपको हल्कापन और असंतुलन महसूस हो सकता है। हालांकि, असली चक्कर आना (सिर घूमने जैसा महसूस होना) आमतौर पर कान के अंदरूनी हिस्से या दिमाग से जुड़ी समस्या होती है, न कि मुख्य रूप से ब्लड प्रेशर की। आपके डॉक्टर दोनों की जांच करेंगे ताकि सही कारण का पता चल सके।

        क्या चक्कर आना ब्रेन स्ट्रोक का संकेत हो सकता है?

        यह चिंता करना स्वाभाविक है। स्ट्रोक से चक्कर आ सकते हैं, लेकिन यह शायद ही कभी अकेला लक्षण होता है। स्ट्रोक से जुड़े चक्कर के साथ आमतौर पर अन्य चेतावनी के संकेत भी होते हैं, जैसे अचानक दोहरी दृष्टि, बोलने या निगलने में कठिनाई, चेहरे पर सुन्नपन, हाथ या पैर में कमज़ोरी, या चलने में असमर्थता। अगर आपको चक्कर के साथ इनमें से कोई भी संकेत दिखे, तो तुरंत इमरजेंसी में जाएं।

        चक्कर और सामान्य सिर घूमने में क्या अंतर है?

        मैं जानता हूँ कि इन दोनों में फर्क समझना मुश्किल हो सकता है। Dizziness एक व्यापक शब्द है जिसका मतलब है अस्थिर महसूस करना, हल्कापन या बेहोशी जैसा लगना। चक्कर का मतलब विशेष रूप से एक झूठा घूमने का एहसास है – जैसे कि आप या कमरा घूम रहा है। चक्कर आमतौर पर कान के अंदरूनी हिस्से या दिमाग की समस्या का संकेत देता है। हल्कापन (बिना घूमने के एहसास के) कम ब्लड प्रेशर, चिंता या पानी की कमी के कारण हो सकता है।

        क्या मुझे जीवन भर चक्कर आते रहेंगे?

        नहीं, ज़्यादातर मामलों में चक्कर आने का इलाज संभव है। BPPV (सबसे आम कारण) को ज़्यादातर मामलों में एक साधारण maneuver से ठीक किया जा सकता है। Vestibular neuritis आमतौर पर कुछ हफ्तों से महीनों में ठीक हो जाता है। Meniere’s disease एक पुरानी बीमारी है लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। सही निदान और इलाज से बार-बार आने वाले चक्कर भी काफी हद तक बेहतर हो जाते हैं।

        क्या चक्कर आने पर घर पर भाप लेना सुरक्षित है?

        मैं समझता हूँ कि लोग अक्सर भाप लेने के बारे में सोचते हैं। भाप लेना आमतौर पर सुरक्षित है, खासकर अगर आपको नाक बंद होने या साइनस की समस्या के कारण सिर भारी लग रहा हो। यह नाक के रास्ते को खोलने में मदद कर सकता है। हालांकि, यह सीधे तौर पर चक्कर आने की समस्या का इलाज नहीं है, लेकिन यह आपको थोड़ा आरामदायक महसूस करा सकता है।

        क्या चक्कर आने पर कान में कुछ डालना चाहिए?

        नहीं, बिल्कुल नहीं। मेरे clinic में मैंने देखा है कि लोग अक्सर चक्कर या कान दर्द में कान में तेल, लहसुन का रस या कोई अन्य तरल पदार्थ डाल लेते हैं। यह बहुत खतरनाक हो सकता है, खासकर अगर आपके कान के पर्दे में छेद हो। इससे गंभीर इन्फेक्शन हो सकता है और आपकी समस्या और बढ़ सकती है। कान में कुछ भी डालने से पहले हमेशा एक ENT specialist से सलाह लें।

        चक्कर आने पर कब तक घर पर इंतज़ार कर सकते हैं?

        अगर आपको हल्के-फुल्के चक्कर आ रहे हैं और उनके साथ कोई अन्य गंभीर लक्षण नहीं है, तो आप 1-2 दिन घर पर आराम करके और बताए गए सुरक्षित उपाय अपनाकर देख सकते हैं। लेकिन, अगर 2-3 दिनों में भी आराम न मिले, या चक्कर बार-बार आएं, या कोई भी ‘रेड फ्लैग’ लक्षण दिखे, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें। घर पर ज़्यादा इंतज़ार करना ठीक नहीं।

        क्या चक्कर आने पर कोई खास खाने-पीने की चीज़ों से बचना चाहिए?

        हाँ, कुछ चीज़ें हैं जिनसे बचना बेहतर हो सकता है। कैफीन (कॉफी, चाय), शराब, और ज़्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थ कुछ लोगों में चक्कर के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं, खासकर अगर आपको Meniere’s disease जैसी कोई अंतर्निहित स्थिति हो। अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करें, वे आपकी स्थिति के अनुसार सही आहार सलाह दे सकते हैं।

        ऑनलाइन कंसल्टेशन कैसे लें

        अगर आप लखनऊ या आसपास के इलाकों जैसे हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, बाराबंकी, कानपुर या फैजाबाद में रहते हैं और आपको चक्कर आने की समस्या है, तो आपको विशेषज्ञ ENT सलाह की ज़रूरत हो सकती है। मेरे Prime ENT Center, हरदोई में, हम आपकी सुविधा के लिए ऑनलाइन कंसल्टेशन भी प्रदान करते हैं।

        आप घर बैठे ही WhatsApp, वीडियो कॉल या फोन के माध्यम से मुझसे सलाह ले सकते हैं। आपको बस अपने लक्षणों और किसी भी पिछली रिपोर्ट के बारे में बताना होगा, और मैं आपको सही निदान और आगे के इलाज के बारे में मार्गदर्शन कर सकता हूँ। टेक्नोलॉजी की मदद से, अब आपको विशेषज्ञ सलाह के लिए दूर यात्रा करने की ज़रूरत नहीं है। अपॉइंटमेंट के लिए आप +91-7393062200 पर WhatsApp या कॉल कर सकते हैं, या हमारी वेबसाइट https://primeentcenter.in पर जा सकते हैं। आपकी सेहत हमारी प्राथमिकता है।

        अस्वीकरण

        यह article सिर्फ educational purpose के लिए है। यह किसी भी तरह से doctor की सलाह, जाँच या ilaj की जगह नहीं ले सकता। कोई भी dawai या ilaj अपने doctor की सलाह के बिना शुरू या बंद ना करें।

        Medically reviewed by: Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB ENT | Last updated: 01 March 2026


        ⚕️ मेडिकल डिस्क्लेमर

        यह जानकारी शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। अपनी स्वास्थ्य समस्या के लिए हमेशा ENT विशेषज्ञ से मिलें।

        Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB (ENT), CAMVD) | About | Prime ENT Center, Hardoi

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Dr. Prateek Porwal
MBBS, DNB ENT, CAMVD — Vertigo & ENT Specialist

Founder, Prime ENT Center, Hardoi, UP. Inventor of the Bangalore Maneuver for BPPV. Only VNG + Stabilometry clinic in Central UP. Online consultations available across India — drprateekporwal.com · 7393062200

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