🩺 Docvani — हिंदी | Noida | लक्षण और पहचान
लेखक: डॉ. प्रतीक पोरवाल (Dr. Prateek Porwal), MBBS, DNB (ENT), CAMVD | अनुभव: 13+ वर्ष
Prime ENT Center — online consultation available
✅ Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB (ENT), CAMVD) द्वारा चिकित्सकीय समीक्षा — 2026-04-10 | अंतिम चिकित्सा समीक्षा: 2026-04-10
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क्रुप क्यों होता है — नोएडा
क्रुप बच्चों में होने वाली एक आम श्वसन संबंधी समस्या है, खासकर छोटे बच्चों में। नोएडा जैसे शहरों में, जहां मौसम और प्रदूषण में बदलाव होता रहता है, बच्चों को यह दिक्कत होना कोई नई बात नहीं है। इसमें बच्चे की सांस की नली और स्वरयंत्र में सूजन आ जाती है, जिससे उन्हें एक खास तरह की ‘भौंकने वाली खांसी’ (barking cough), आवाज़ में भारीपन और सांस लेते समय घरघराहट महसूस होती है।
अगर आपके बच्चे को ऐसे लक्षण दिखें, तो घबराने की बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है, क्योंकि सही समय पर इलाज से बच्चे को आराम मिल सकता है।
अभी क्या करें
- घर पर राहत: बच्चे को शांत रखने की कोशिश करें, क्योंकि रोने से उसकी सांस की तकलीफ बढ़ सकती है। उसे सीधा बिठाएं या थोड़ा ऊंचा तकिया लगाकर सुलाएं ताकि सांस लेने में आसानी हो। कमरे में नमी बनाए रखने के लिए humidifier का इस्तेमाल कर सकते हैं, पर सिर्फ इसी पर निर्भर न रहें।
- डॉक्टर को दिखाएं: अगर बच्चे को क्रुप के लक्षण (जैसे भौंकने वाली खांसी, आवाज़ में भारीपन, सांस लेते समय घरघराहट) दिखें और ये 2-3 दिन से ज़्यादा रहें या बिगड़ते जाएं, तो तुरंत ENT specialist से मिलें। डॉक्टर सही जांच करके इलाज शुरू कर सकते हैं।
- तुरंत जाएं: अगर बच्चे को सांस लेने में बहुत ज़्यादा दिक्कत हो, होंठ या नाखून नीले पड़ने लगें, या वह बहुत सुस्त लगे, तो बिना देर किए इमरजेंसी में जाएं। ये गंभीर क्रुप के लक्षण हो सकते हैं जिनमें तुरंत मेडिकल सहायता की ज़रूरत होती है।
क्रुप का हिंदी में क्या अर्थ है?
क्रुप (जिसे डॉक्टरी भाषा में वायरल लैरिंजोट्रैकियोब्रोंकाइटिस भी कहते हैं) एक ऐसी बीमारी है जिसमें बच्चों की सांस की नली और स्वरयंत्र में इन्फेक्शन की वजह से सूजन आ जाती है। यह सूजन सांस के रास्ते को संकरा कर देती है, जिससे बच्चे को सांस लेने में परेशानी होती है और एक खास तरह की आवाज़ आती है। मेरे अनुभव में, नोएडा और आस-पास के इलाकों जैसे गाज़ियाबाद, दिल्ली और फरीदाबाद से आने वाले कई माता-पिता अपने बच्चों में इस croup disease के लक्षणों को लेकर चिंतित रहते हैं।

यह बच्चों में सांस की नली में रुकावट का सबसे आम कारण है, खासकर 6 महीने से 3 साल तक के बच्चों में, और 2 साल की उम्र में यह सबसे ज़्यादा देखा जाता है।
इस क्रुप syndrome में बच्चे को अक्सर सर्दी-ज़ुकाम जैसे लक्षण पहले से होते हैं, जैसे नाक बहना या हल्का बुखार। फिर धीरे-धीरे उसकी आवाज़ भारी होने लगती है और उसे एक सूखी, भौंकने वाली खांसी आने लगती है। रात के समय ये लक्षण अक्सर और बिगड़ जाते हैं।
यह समझना ज़रूरी है कि क्रुप meaning in hindi सिर्फ एक खांसी नहीं है, बल्कि यह सांस की नली की सूजन से जुड़ी एक स्थिति है जिस पर ध्यान देना ज़रूरी है।
तुरंत डॉक्टर के पास कब जाएं?
क्रुप के ज़्यादातर मामले हल्के होते हैं और घर पर ही ठीक हो जाते हैं, पर कुछ स्थितियों में तुरंत डॉक्टर की मदद लेना बहुत ज़रूरी हो जाता है। इन गंभीर लक्षणों को कभी नज़रअंदाज़ न करें:
- सांस लेने में बहुत ज़्यादा दिक्कत: अगर बच्चे को सांस लेने में काफी ज़ोर लगाना पड़ रहा है, उसकी पसलियां अंदर धंस रही हैं, या वह हांफ रहा है, तो यह गंभीर रुकावट का संकेत है।
- होंठ या नाखून नीले पड़ना: यह शरीर में ऑक्सीजन की कमी का बहुत गंभीर संकेत है। अगर ऐसा दिखे तो तुरंत इमरजेंसी में ले जाएं।
- लगातार लार टपकना और निगलने में परेशानी: अगर बच्चे को लार टपक रही है और वह कुछ निगल नहीं पा रहा है, तो समझ लें कि यह एपिग्लोटाइटिस जैसी ज़्यादा गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है, जिसमें सांस की नली अचानक बंद हो सकती है।
- सांस की आवाज़ का अचानक शांत हो जाना, जबकि बच्चा अभी भी परेशान दिखे: यह एक खतरनाक संकेत है। इसका मतलब यह हो सकता है कि सांस की नली इतनी ज़्यादा संकरी हो गई है कि हवा अंदर-बाहर जा ही नहीं पा रही है।
- तेज़ बुखार और बीमार दिखना: अगर बच्चे को क्रुप के
क्रुप के लक्षण
क्रुप के लक्षण अक्सर सर्दी-ज़ुकाम जैसे हल्के लक्षणों के बाद शुरू होते हैं और धीरे-धीरे बढ़ते हैं। इन लक्षणों को पहचानना बहुत ज़रूरी है ताकि सही समय पर इलाज मिल सके:
- भौंकने वाली खांसी: यह क्रुप का सबसे खास लक्षण है। बच्चे की खांसी किसी सील या कुत्ते के भौंकने जैसी आवाज़ करती है। यह खांसी सांस की नली के निचले हिस्से में सूजन के कारण होती है।
- आवाज़ में भारीपन: बच्चे की आवाज़ भारी या कर्कश हो जाती है, क्योंकि स्वरयंत्र में सूजन से vocal cords ठीक से कंपन नहीं कर पाते।
- सांस लेते समय घरघराहट: जब बच्चा सांस अंदर लेता है, तो एक तेज़, सीटी जैसी आवाज़ आती है। यह सांस की नली के ऊपरी हिस्से में रुकावट का संकेत है। जैसे-जैसे सूजन बढ़ती है, यह आवाज़ सांस अंदर और बाहर दोनों लेते समय आ सकती है।
- पहले से सर्दी-ज़ुकाम के लक्षण: क्रुप शुरू होने से पहले बच्चे को अक्सर नाक बहना, हल्का बुखार, या गले में खराश जैसे सामान्य सर्दी के लक्षण होते हैं।
- रात में लक्षणों का बिगड़ना: क्रुप के लक्षण अक्सर रात के समय ज़्यादा गंभीर हो जाते हैं। ठंडी और सूखी हवा, और पीठ के बल लेटने से सूजन बढ़ सकती है।
- हल्का बुखार: बच्चे को हल्का बुखार भी हो सकता है, जो वायरल इन्फेक्शन का एक सामान्य संकेत है।
- सांस लेने में ज़ोर लगाना: गंभीर मामलों में, बच्चा सांस लेने के लिए अपनी छाती और गर्दन की मांसपेशियों का इस्तेमाल करता है। उसकी पसलियां और गर्दन की त्वचा सांस लेते समय अंदर धंसती हुई दिख सकती है।
क्रुप के कारण
क्रुप मुख्य रूप से वायरल इन्फेक्शन के कारण होता है। ये वायरस बच्चे की सांस की नली और स्वरयंत्र में सूजन पैदा करते हैं, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। यह एक croup disease है जो बच्चों में बहुत आम है।
- पैराइन्फ्लुएंजा वायरस: यह क्रुप का सबसे आम कारण है। यह वायरस स्वरयंत्र और सांस की नली की कोशिकाओं को संक्रमित करता है, जिससे वहां सूजन और बलगम जमा हो जाता है।
- रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस: यह भी एक आम वायरस है जो बच्चों में श्वसन संबंधी इन्फेक्शन पैदा करता है। RSV भी क्रुप के लक्षणों को जन्म दे सकता है, खासकर छोटे बच्चों में।
- राइनोवायरस: यह वायरस आमतौर पर सामान्य सर्दी-ज़ुकाम का कारण बनता है, लेकिन कुछ मामलों में यह स्वरयंत्र तक फैलकर क्रुप के लक्षण भी पैदा कर सकता है।
- अन्य वायरस: कभी-कभी इन्फ्लुएंजा वायरस या एडेनोवायरस जैसे अन्य वायरस भी क्रुप का कारण बन सकते हैं, हालांकि ये कम आम हैं।
क्रुप में इस समस्या के स्थानीय कारण
नोएडा, उत्तर प्रदेश के एक बड़े शहर के रूप में, कुछ ऐसे स्थानीय कारकों से प्रभावित होता है जो बच्चों में क्रुप जैसी श्वसन संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं:
- वायु प्रदूषण: सर्दियों के महीनों में नोएडा में वायु प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ जाता है। प्रदूषित हवा सांस की नली में जलन पैदा कर सकती है, जिससे बच्चे वायरल इन्फेक्शन के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हो जाते हैं और क्रुप के लक्षण बिगड़ सकते हैं।
- मौसम में बदलाव: नोएडा में गर्मियां बहुत तेज़ और सर्दियां बहुत ठंडी होती हैं। मौसम में अचानक बदलाव, खासकर सर्दियों की शुरुआत में, बच्चों को श्वसन संबंधी इन्फेक्शन के लिए ज़्यादा संवेदनशील बना देता है, जिससे क्रुप के मामले बढ़ जाते हैं।
- धूल भरी आंधियां: प्री-मॉनसून सीज़न में नोएडा में धूल भरी आंधियां चलती हैं। ये धूल के कण सांस की नली में जलन पैदा कर सकते हैं और वायरल इन्फेक्शन के साथ मिलकर क्रुप के लक्षणों को और गंभीर बना सकते हैं।
- भीड़भाड़ वाले इलाके: नोएडा में आबादी का घनत्व ज़्यादा है और बच्चे अक्सर स्कूल, प्ले-स्कूल या खेल के मैदानों में एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं। इससे वायरल इन्फेक्शन आसानी से फैलते हैं, जिससे क्रुप जैसी बीमारियां भी बढ़ती हैं।
जांच और निदान
जब कोई बच्चा क्रुप के लक्षणों के साथ मेरे Prime ENT Center में आता है, तो सबसे पहले मैं बच्चे की पूरी हिस्ट्री लेता हूँ। मैं माता-पिता से पूछता हूँ कि बच्चे को कब से खांसी, आवाज़ में भारीपन या सांस लेने में दिक्कत हो रही है, और क्या उसे पहले सर्दी-ज़ुकाम के लक्षण थे। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि क्रुप का निदान मुख्य रूप से बच्चे के लक्षणों और शारीरिक जांच पर आधारित होता है।
मैं बच्चे के गले और छाती की जांच करता हूँ, उसकी सांस लेने की आवाज़ सुनता हूँ और देखता हूँ कि उसे सांस लेने में कितना ज़ोर लगाना पड़ रहा है। AAO-HNS guidelines के अनुसार, क्रुप का निदान आमतौर पर clinical diagnosis होता है, यानी लक्षणों और जांच के आधार पर। कुछ मामलों में, अगर स्थिति गंभीर लगे या निदान स्पष्ट न हो, तो एक्स-रे करवाया जा सकता है।
एक्स-रे में सांस की नली के निचले हिस्से में ‘स्टीपल साइन’ (steeple sign) दिख सकता है, जो सूजन का संकेत देता है। बच्चे के ऑक्सीजन स्तर को मापने के लिए पल्स ऑक्सीमेट्री का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, ऑक्सीजन की कमी airway obstruction का एक बहुत देर का संकेत है। बहुत ही दुर्लभ या बार-बार होने वाले क्रुप के मामलों में, डायरेक्ट लैरिंजोट्रैकियोब्रोंकोस्कोपी (DLTB) की ज़रूरत पड़ सकती है, जिससे सांस की नली के अंदर की सूजन को सीधे देखा जा सके। यह सब बच्चे को बेहतर महसूस कराने और सही इलाज देने के लिए किया जाता है।
इलाज के विकल्प
क्रुप का इलाज बच्चे की स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करता है। ज़्यादातर मामलों में, यह एक वायरल इन्फेक्शन है जो कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन लक्षणों को कम करने और बच्चे को आराम देने के लिए कुछ दवाएं दी जा सकती हैं।
डॉक्टर का इलाज
डॉक्टर आमतौर पर सूजन को कम करने और सांस लेने में आसानी के लिए दवाएं देते हैं। मौखिक स्टेरॉयड दवाइयां (जैसे स्टेरॉयड दवाई) सूजन को कम करने में बहुत प्रभावी होती हैं और अक्सर एक ही खुराक से काफी आराम मिल जाता है। गंभीर मामलों में, नेबुलाइज़र के ज़रिए दी जाने वाली स्टेरॉयड दवाइयां (जैसे nebulised नाक की स्प्रे) या एड्रेनालाईन का उपयोग किया जा सकता है, जो सांस की नली को तुरंत खोलने में मदद करती हैं।
अगर बच्चे को ऑक्सीजन की कमी हो रही हो, तो ऑक्सीजन थेरेपी दी जा सकती है। बहुत गंभीर मामलों में, Heliox (80% हीलियम और 20% ऑक्सीजन का मिश्रण) का उपयोग किया जा सकता है, जो सांस लेने में और मदद करता है।
सर्जरी कब?
क्रुप के ज़्यादातर मामलों में सर्जरी की ज़रूरत नहीं पड़ती, क्योंकि यह एक वायरल इन्फेक्शन है जो दवाओं से ठीक हो जाता है। हालांकि, अगर बच्चे की सांस की नली में रुकावट बहुत गंभीर हो और दवाओं से भी आराम न मिले, तो कुछ दुर्लभ स्थितियों में सर्जरी पर विचार किया जा सकता है। इसमें सांस की नली को खुला रखने के लिए nasotracheal intubation या बहुत ही गंभीर और जानलेवा मामलों में tracheostomy (गर्दन में एक छोटा सा छेद करके सीधे सांस की नली में ट्यूब डालना) जैसी प्रक्रियाएं करनी पड़ सकती हैं।
यह तब किया जाता है जब बच्चे की जान को खतरा हो और अन्य सभी इलाज विफल हो जाएं।
घर पर क्या करें, क्या न करें?
क्रुप से पीड़ित बच्चे की देखभाल घर पर करना माता-पिता के लिए चिंता का विषय हो सकता है। कुछ बातें हैं जो आप कर सकते हैं और कुछ बातें हैं जिनसे आपको बचना चाहिए।
क्या करें
- बच्चे को शांत रखें: रोने या उत्तेजित होने से बच्चे की सांस की तकलीफ बढ़ सकती है। उसे गोद में लेकर या प्यार से बात करके शांत रखने की कोशिश करें।
- सीधा बिठाएं: बच्चे को सीधा बिठाएं या सोते समय उसके सिर को थोड़ा ऊंचा रखें। इससे सांस की नली पर दबाव कम होता है और सांस लेने में आसानी होती है।
- पर्याप्त तरल पदार्थ दें: बच्चे को पानी, जूस या सूप जैसे तरल पदार्थ थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार देते रहें। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी और बलगम पतला रहेगा।
- हल्की नमी वाला वातावरण: कमरे में humidifier का इस्तेमाल करें या बाथरूम में गर्म पानी चलाकर भाप वाला वातावरण बनाएं और बच्चे को कुछ देर वहां बिठाएं। नमी से सांस की नली को आराम मिल सकता है।
- सांस लेने के तरीके पर नज़र रखें: बच्चे की सांस लेने की गति, पसलियों का धंसना और होंठों के रंग पर लगातार नज़र रखें। अगर कोई भी लक्षण बिगड़ता दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
क्या न करें
- भाप या humidifier पर पूरी तरह निर्भर न रहें: भाप से थोड़ी देर के लिए आराम मिल सकता है, लेकिन यह क्रुप का मुख्य इलाज नहीं है। स्टेरॉयड दवाइयां ही सबसे प्रभावी इलाज हैं।
- बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं न दें: खांसी की दवाएं या एंटीहिस्टामाइन क्रुप में अक्सर प्रभावी नहीं होतीं और कुछ मामलों में बच्चे को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं।
- बच्चे को पीठ के बल सीधा न लिटाएं: इससे सांस की नली पर दबाव बढ़ सकता है और सांस लेने में ज़्यादा दिक्कत हो सकती है।
- लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें: अगर बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही है या उसके लक्षण बिगड़ रहे हैं, तो घर पर इंतज़ार न करें। तुरंत मेडिकल सहायता लें।
- गले की जांच करने की कोशिश न करें: अगर बच्चे को लार टपक रही है और वह निगल नहीं पा रहा है, तो उसके गले की जांच करने की कोशिश बिल्कुल न करें। इससे सांस की नली पूरी तरह बंद हो सकती है।
बचाव
नोएडा जैसे शहर में जहां प्रदूषण और मौसम का मिजाज बदलता रहता है, बच्चों को क्रुप जैसी श्वसन संबंधी बीमारियों से बचाना एक चुनौती हो सकता है। कुछ बातों का ध्यान रखकर आप अपने बच्चे को सुरक्षित रख सकते हैं:
- हाथों की स्वच्छता: बच्चों को बार-बार हाथ धोने की आदत डालें, खासकर खाने से पहले और बाहर से आने के बाद। यह वायरल इन्फेक्शन को फैलने से रोकने का सबसे आसान तरीका है।
- टीकाकरण: बच्चे का टीकाकरण समय पर करवाएं। हालांकि क्रुप के लिए कोई सीधा टीका नहीं है, पर फ्लू और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों के टीके इन्फेक्शन के जोखिम को कम कर सकते हैं।
- प्रदूषण से बचाव: सर्दियों में जब नोएडा में वायु प्रदूषण (AQI) का स्तर ज़्यादा हो, तो बच्चों को बाहर कम निकलने दें। घर के अंदर air purifier का इस्तेमाल कर सकते हैं और खिड़कियां बंद रखें।
- भीड़भाड़ से बचें: फ्लू और सर्दी-ज़ुकाम के मौसम में बच्चों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर ले जाने से बचें, जहां इन्फेक्शन फैलने का खतरा ज़्यादा होता है।
- स्वस्थ आहार और पर्याप्त नींद: बच्चे को पौष्टिक आहार दें और सुनिश्चित करें कि उसे पर्याप्त नींद मिले। एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करती है।
- बीमार लोगों से दूरी: अगर घर में कोई बीमार है, तो उसे बच्चे से दूर रखें और मास्क पहनने के लिए कहें ताकि इन्फेक्शन बच्चे तक न पहुंचे।
अस्वीकरण
यह लेख सिर्फ शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह से डॉक्टर की सलाह, जांच या इलाज की जगह नहीं ले सकता। कोई भी दवाई या इलाज अपने डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद न करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अगर मेरे बच्चे को रात में साँस लेने में आपात स्थिति हो तो मुझे क्या करना चाहिए?
Croup के लक्षण अक्सर रात में बिगड़ जाते हैं, इसलिए तैयार रहना महत्वपूर्ण है। यदि आपके बच्चे को अचानक गंभीर सांस लेने में कठिनाई होती है, जैसे आराम करते समय लगातार शोर भरी सांस, छाती का बहुत अधिक अंदर की ओर धंसना, या होंठ नीले पड़ना, तो तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। सहायता की प्रतीक्षा करते समय उन्हें शांत रखने की कोशिश करें और उन्हें सीधा बिठाएं।
क्रुप के उपचार बच्चों के लिए सुरक्षित हैं?
हाँ, Croup के उपचार, जैसे कि कुछ दवाएं और नेबुलाइज़्ड थेरेपी, बच्चों के लिए आमतौर पर सुरक्षित और प्रभावी माने जाते हैं जब उन्हें चिकित्सा पेशेवरों द्वारा दिया जाता है। इन उपचारों को विशेष रूप से श्वास नली की सूजन को कम करने और न्यूनतम जोखिम के साथ सांस लेने में सुधार करने के लिए चुना जाता है। आपके डॉक्टर आपके बच्चे के लिए सबसे उपयुक्त और सुरक्षित उपचार योजना निर्धारित करेंगे।
क्रुप आमतौर पर कितने समय तक रहता है?
Croup के लक्षणों में आमतौर पर कुछ दिनों के भीतर सुधार होता है, हालांकि भौंकने वाली खांसी एक सप्ताह तक रह सकती है। सबसे गंभीर सांस लेने में कठिनाई आमतौर पर पहली दो से तीन रातों में होती है। अधिकांश बच्चे उचित देखभाल और दवा से अच्छी तरह ठीक हो जाते हैं।
क्रुप क्या है?
क्रुप एक सामान्य वायरल इन्फेक्शन है जो आपके बच्चे के voice box और श्वासनली में सूजन पैदा करता है। इस सूजन के कारण एक खास तरह की भौंकने वाली खांसी, आवाज़ में भारीपन और शोर भरी सांस आती है। यह छोटे बच्चों में तीव्र वायुमार्ग अवरोध का सबसे आम कारण है।
क्रुप मेरे बच्चे की साँस लेने की प्रक्रिया को कैसे प्रभावित करता है?
क्रुप आपके बच्चे के वोकल कॉर्ड्स के ठीक नीचे वायुमार्ग में सूजन पैदा करता है, जिससे सांस लेने का रास्ता संकरा हो जाता है। इस संकरेपन के कारण फेफड़ों में हवा का जाना मुश्किल हो जाता है, जिससे स्ट्रिडोर नामक शोर भरी सांस आती है। आपका बच्चा सांस लेने में अधिक प्रयास के लक्षण भी दिखा सकता है, जैसे कि अपनी छाती या गर्दन की मांसपेशियों को अंदर खींचना।
- कारण और लक्षण
- कब डॉक्टर को दिखाएं
- घर पर देखभाल
- डॉक्टर से कैसे मिलें
- बचाव के उपाय
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