🩺 Docvani — हिंदी | Delhi | लक्षण और पहचान
लेखक: डॉ. प्रतीक पोरवाल (Dr. Prateek Porwal), MBBS, DNB (ENT), CAMVD | अनुभव: 13+ वर्ष
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✍️ Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB (ENT), CAMVD) — ENT Specialist | Docvani Health Education | अंतिम चिकित्सा समीक्षा: April 2026
टॉन्सिल बढ़ना क्यों होता है — दिल्ली दिल्ली में बहुत से लोग अक्सर गले में दर्द और निगलने में परेशानी की शिकायत लेकर मेरे पास आते हैं, और जब जांच करते हैं तो पता चलता है कि उनके टॉन्सिल बढ़ गए हैं। सच कहूं तो, टॉन्सिल बढ़ना एक आम समस्या है, खासकर बच्चों में, लेकिन बड़ों को भी यह हो सकता है। यह आमतौर
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टॉन्सिल बढ़ना क्यों होता है — दिल्ली
दिल्ली में बहुत से लोग अक्सर गले में दर्द और निगलने में परेशानी की शिकायत लेकर मेरे पास आते हैं, और जब जांच करते हैं तो पता चलता है कि उनके टॉन्सिल बढ़ गए हैं। सच कहूं तो, टॉन्सिल बढ़ना एक आम समस्या है, खासकर बच्चों में, लेकिन बड़ों को भी यह हो सकता है। यह आमतौर पर इन्फेशन की वजह से होता है और सही समय पर इलाज न मिलने पर यह और भी परेशान कर सकता है।
टॉन्सिल बढ़ने से क्या दिक्कत होती है?
तो देखिये, हमारे गले के पीछे दोनों तरफ दो छोटे-छोटे अंग होते हैं जिन्हें टॉन्सिल कहते हैं। ये हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम का हिस्सा होते हैं, जो मुंह और नाक के रास्ते आने वाले कीटाणुओं से लड़ने में मदद करते हैं। जब ये टॉन्सिल खुद इन्फेक्शन का शिकार हो जाते हैं और सूज जाते हैं, तो इसी को टॉन्सिल बढ़ना या टॉन्सिल की सूजन कहते हैं।
दिल्ली जैसे शहर में, जहां प्रदूषण और धूल-मिट्टी बहुत ज़्यादा है, लोगों को यह समस्या अक्सर हो जाती है। यह सिर्फ गले का दर्द नहीं है, बल्कि टॉन्सिल में इन्फेक्शन के कारण होने वाली एक खास तरह की सूजन है।

जब टॉन्सिल सूज जाते हैं, तो वे लाल दिख सकते हैं, उन पर सफेद धब्बे या पस भी हो सकता है। यह निगलने में बहुत दर्द देता है, और कभी-कभी तो खाना-पीना भी मुश्किल हो जाता है। बहुत लोग यह गलती करते हैं — इसे सामान्य गले का दर्द समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, पर टॉन्सिल बढ़ना एक अलग स्थिति है जिसमें टॉन्सिल खुद इन्फेक्टेड हो जाते हैं।
टॉन्सिल के लक्षण
जब आपके टॉन्सिल में इन्फेक्शन होता है, तो इसके कई लक्षण दिख सकते हैं जो रोज़मर्रा के कामों को मुश्किल बना देते हैं। मेरे OPD में मैंने देखा है कि मरीज़ अक्सर इन लक्षणों को लेकर परेशान रहते हैं।
- गले में तेज़ दर्द: यह सबसे आम लक्षण है। निगलने में बहुत ज़्यादा दर्द होता है, जिसे ओडिनोफेजिया कहते हैं। कई बार तो थूक निगलना भी मुश्किल हो जाता है।
- बुखार और ठंड लगना: शरीर का तापमान बढ़ जाता है और मरीज़ को ठंड महसूस हो सकती है। यह इन्फेक्शन के खिलाफ शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया है।
- थकान और सिरदर्द: इन्फेक्शन के कारण शरीर में कमज़ोरी और थकान महसूस होती है, साथ ही सिर में दर्द भी हो सकता है।
- टॉन्सिल का लाल होना और सूजन: जब डॉक्टर गले की जांच करते हैं, तो टॉन्सिल लाल और सूजे हुए दिखते हैं। कभी-कभी उन पर सफेद या पीले रंग के धब्बे या पस भी जमा हो सकता है।
- गर्दन में गांठें (लिम्फ नोड्स): गले के नीचे या गर्दन में दर्द भरी गांठें महसूस हो सकती हैं। ये लिम्फ नोड्स होते हैं जो इन्फेक्शन से लड़ने के लिए सूज जाते हैं।
- भूख न लगना: गले में दर्द के कारण खाना खाने की इच्छा कम हो जाती है, जिससे कमज़ोरी और बढ़ सकती है।
तुरंत डॉक्टर के पास कब जाएं?
कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि वे गंभीर जटिलताओं का संकेत हो सकते हैं।
- मुंह खोलने में दिक्कत और एक तरफा गले में दर्द: अगर आपको मुंह खोलने में बहुत ज़्यादा दिक्कत हो रही है और गले में एक तरफ बहुत तेज़ दर्द है, तो यह पेरिटॉन्सिलर एब्सेस का संकेत हो सकता है, जिसमें टॉन्सिल के पास पस जमा हो जाता है।
- सांस लेने में दिक्कत के साथ दोनों टॉन्सिल का बहुत ज़्यादा बढ़ना: अगर टॉन्सिल इतने ज़्यादा सूज गए हैं कि सांस लेने में परेशानी हो रही है, खासकर बच्चों में, तो यह एक गंभीर स्थिति हो सकती है जिसमें तुरंत मेडिकल हेल्प की ज़रूरत होती है।
- टॉन्सिल का एक तरफ से बड़ा होना और उसकी सतह का असमान या अल्सर वाला दिखना: अगर आपके टॉन्सिल एक तरफ से ज़्यादा बड़े दिख रहे हैं और उनकी सतह चिकनी नहीं है, तो यह टॉन्सिलर लिम्फोमा या किसी और गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।
- किसी वयस्क धूम्रपान करने वाले व्यक्ति में 3 हफ़्तों से ज़्यादा समय तक एक तरफा गले में दर्द: अगर आप धूम्रपान करते हैं और 3 हफ़्तों से ज़्यादा समय से आपके गले में एक तरफ दर्द है, तो यह मुंह या गले के कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है।
टॉन्सिल बढ़ने के कारण
टॉन्सिल बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से ज़्यादातर इन्फेक्शन से जुड़े होते हैं। दिल्ली में, जहां लोग अक्सर भीड़भाड़ वाली जगहों पर रहते हैं और प्रदूषण का स्तर भी ऊंचा रहता है, इन्फेक्शन फैलने की संभावना बढ़ जाती है।
- बैक्टीरियल इन्फेक्शन (GABHS): ग्रुप ए बीटा-हीमोलिटिक स्ट्रेप्टोकोकी (GABHS) बैक्टीरिया टॉन्सिल बढ़ने का सबसे आम बैक्टीरियल कारण है। यह इन्फेक्शन अक्सर बच्चों और किशोरों में देखा जाता है। डॉक्टर Centor score का उपयोग करके वायरल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन के बीच अंतर करने की कोशिश करते हैं।
- वायरल इन्फेक्शन: लगभग 40-60% गले के इन्फेक्शन वायरल होते हैं, और इनमें टॉन्सिल भी सूज सकते हैं। राइनोवायरस, एडेनोवायरस, EBV (एपस्टीन-बार वायरस), CMV (साइटोमेगालोवायरस) और HSV (हर्पीस सिंप्लेक्स वायरस) जैसे वायरस टॉन्सिल बढ़ने का कारण बन सकते हैं।
- EBV (इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लिओसिस): यह एक खास तरह का वायरल इन्फेक्शन है जिसे “ग्लैंडुलर फीवर” भी कहते हैं। इसमें टॉन्सिल बहुत ज़्यादा सूज जाते हैं, साथ ही पूरे शरीर में लिम्फ नोड्स भी बढ़ जाते हैं। इसमें एम्पीसिलीन जैसी एंटीबायोटिक लेने से शरीर पर दाने निकल सकते हैं।
- फ्यूसोबैक्टीरियम और एस. मिलरी: ये बैक्टीरिया भी टॉन्सिल के इन्फेक्शन का कारण बन सकते हैं और अक्सर पेरिटॉन्सिलर एब्सेस (टॉन्सिल के पास पस जमा होना) से जुड़े होते हैं।
दिल्ली में इस समस्या के स्थानीय कारण
दिल्ली में रहने वाले लोगों को कुछ खास पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़े कारणों से टॉन्सिल बढ़ने की समस्या ज़्यादा हो सकती है:
- PM 2.5 और स्मॉग: दिल्ली की हवा में PM 2.5 जैसे सूक्ष्म कण और स्मॉग का उच्च स्तर गले और श्वसन तंत्र में जलन पैदा करता है, जिससे टॉन्सिल इन्फेक्शन के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
- पराली जलाना और प्रदूषण: अक्टूबर-नवंबर के दौरान पराली जलाने से होने वाला धुआं और वाहनों का प्रदूषण गले में लगातार जलन पैदा करता है, जिससे टॉन्सिल की सूजन बढ़ जाती है।
- निर्माण की धूल: दिल्ली-NCR में लगातार चल रहे निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल भी गले में इन्फेक्शन और जलन का एक बड़ा कारण बनती है, जिससे टॉन्सिल सूज सकते हैं।
- सर्दी में शुष्क हवा: दिल्ली की सर्दियां बहुत शुष्क होती हैं, जिससे गले में सूखापन और जलन होती है, जो इन्फेक्शन को बढ़ावा दे सकती है।
- भीड़भाड़ वाले इलाके: दिल्ली में भीड़भाड़ वाली सार्वजनिक जगहों और परिवहन में इन्फेक्शन फैलाने वाले वायरस और बैक्टीरिया आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल जाते हैं।
टॉन्सिल और दूसरी बीमारियों में फ़र्क
कई बार गले की दूसरी समस्याओं को भी लोग टॉन्सिल बढ़ना समझ लेते हैं, पर हर गले का दर्द टॉन्सिल नहीं होता। सही इलाज के लिए यह समझना ज़रूरी है कि आपकी समस्या टॉन्सिल की है या कुछ और।
| विशेषता | टॉन्सिल बढ़ना | सामान्य गले का दर्द | पेरिटॉन्सिलर एब्सेस | इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लिओसिस |
| मुख्य लक्षण | टॉन्सिल की सूजन, निगलने में दर्द | गले में खराश, जलन | एक तरफा तेज़ दर्द, मुंह खोलने में दिक्कत | बहुत सूजे टॉन्सिल, थकान, पूरे शरीर में गांठें |
| अवधि | कुछ दिन से एक हफ़्ते | 2-3 दिन | गंभीर, तुरंत इलाज ज़रूरी | हफ़्तों तक चल सकता है |
| कारण | बैक्टीरिया या वायरस | वायरस (ज़्यादातर) | बैक्टीरिया (गंभीर इन्फेक्शन) | EBV वायरस |
| कब चिंता करें | तेज़ बुखार, पस, बार-बार इन्फेक्शन | अगर 3 दिन से ज़्यादा रहे | हमेशा तुरंत डॉक्टर को दिखाएं | बहुत ज़्यादा थकान, सांस लेने में दिक्कत |
सही diagnosis के लिए ENT specialist से मिलें।
जांच और निदान
जब आप टॉन्सिल बढ़ने की शिकायत लेकर मेरे क्लीनिक में आते हैं, तो सबसे पहले मैं आपसे आपके लक्षणों के बारे में विस्तार से पूछता हूँ। मैं जानना चाहता हूँ कि आपको कब से दर्द है, कितना तेज़ है, बुखार है या नहीं, और क्या आपको निगलने में कोई खास दिक्कत हो रही है। मेरे 13 साल के अनुभव में, यह सारी जानकारी मुझे आपकी स्थिति को समझने में मदद करती है।
इसके बाद, मैं आपके गले की जांच करता हूँ। इसे थ्रोट एग्जामिनेशन कहते हैं। मैं एक छोटी सी टॉर्च और जीभ दबाने वाले उपकरण का उपयोग करके आपके टॉन्सिल को देखता हूँ।
इससे मुझे यह पता चलता है कि टॉन्सिल कितने सूजे हुए हैं, उनका रंग कैसा है, और क्या उन पर सफेद धब्बे या पस दिख रहा है। मैं आपकी गर्दन में लिम्फ नोड्स को भी महसूस करता हूँ, क्योंकि इन्फेक्शन होने पर वे सूज जाते हैं।
कभी-कभी, अगर मुझे बैक्टीरियल इन्फेक्शन का संदेह होता है, तो मैं आपके गले से एक छोटा सा स्वैब (नमूना) लेता हूँ। इसे थ्रोट स्वैब कल्चर कहते हैं। इस नमूने को लैब में जांच के लिए भेजा जाता है ताकि यह पता चल सके कि कौन सा बैक्टीरिया इन्फेक्शन का कारण बन रहा है।
इससे मुझे सही एंटीबायोटिक चुनने में मदद मिलती है। अगर इन्फेक्शियस मोनोन्यूक्लिओसिस (EBV) का संदेह हो, तो मोनोन्यूक्लिओसिस स्पॉट टेस्ट नामक ब्लड टेस्ट भी किया जा सकता है। यह सब जांचें यह सुनिश्चित करने के लिए की जाती हैं कि आपको सही और सटीक इलाज मिले।
इलाज के विकल्प
टॉन्सिल बढ़ने का इलाज उसके कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है। ज़्यादातर मामलों में, सही इलाज से मरीज़ को जल्दी आराम मिल जाता है।
घर पर राहत
जब तक आप डॉक्टर के पास नहीं पहुंच पाते या दवाइयां असर करना शुरू नहीं करतीं, तब तक घर पर कुछ चीज़ें करके आप लक्षणों से राहत पा सकते हैं:
- गर्म नमक के पानी से गरारे: दिन में कई बार गर्म नमक के पानी से गरारे करने से गले की सूजन और दर्द में आराम मिलता है। यह गले को साफ रखने में भी मदद करता है।
- तरल पदार्थों का सेवन: खूब सारे तरल पदार्थ पिएं, जैसे पानी, सूप, या हर्बल चाय। यह गले को नम रखता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है। ठंडा पानी या आइसक्रीम भी गले को आराम दे सकती है।
- आराम करें: शरीर को इन्फेक्शन से लड़ने के लिए पर्याप्त आराम देना बहुत ज़रूरी है। ज़्यादा काम करने से बचें।
डॉक्टर का इलाज
डॉक्टर आपकी जांच के बाद ही सही इलाज तय करते हैं। अगर इन्फेक्शन बैक्टीरियल है, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाइयां दे सकते हैं। अगर दर्द और बुखार ज़्यादा है, तो दर्द की दवाइयां भी दी जा सकती हैं।
पेरिटॉन्सिलर एब्सेस जैसे गंभीर मामलों में, पस को निकालने के लिए एक छोटी सी प्रक्रिया (ड्रेनेज) की ज़रूरत पड़ सकती है, जिसके बाद एंटीबायोटिक दवाइयां दी जाती हैं।
सर्जरी कब?
ज़्यादातर टॉन्सिल बढ़ने के मामलों में सर्जरी की ज़रूरत नहीं पड़ती। सर्जरी, जिसे टॉन्सिललेक्टोमी कहते हैं, तभी की जाती है जब इन्फेक्शन बार-बार होता हो और मरीज़ को बहुत ज़्यादा परेशानी हो। उदाहरण के लिए, अगर किसी को एक साल में 7 बार, या दो साल में हर साल 5 बार, या तीन साल में हर साल 3 बार टॉन्सिल का इन्फेक्शन होता है, तो सर्जरी पर विचार किया जा सकता है।
अगर टॉन्सिल इतने बड़े हो गए हैं कि सांस लेने में दिक्कत हो रही है या बार-बार पेरिटॉन्सिलर एब्सेस बन रहा है, तो भी सर्जरी की सलाह दी जा सकती है।
घर पर क्या करें, क्या न करें?
टॉन्सिल बढ़ने पर घर पर सही देखभाल करना बहुत ज़रूरी है ताकि आप जल्दी ठीक हो सकें और इन्फेक्शन को फैलने से रोक सकें।
- गर्म नमक के पानी से गरारे करें: दिन में 3-4 बार गर्म पानी में थोड़ा नमक डालकर गरारे करें। इससे गले की सूजन कम होती है और दर्द में राहत मिलती है। यह गले को साफ रखने का एक आसान और प्रभावी तरीका है।
- खूब तरल पदार्थ पिएं: पानी, सूप, जूस या हर्बल चाय जैसे तरल पदार्थ खूब पिएं। यह शरीर को हाइड्रेटेड रखता है और गले को सूखने से बचाता है, जिससे दर्द कम होता है।
- नरम और ठंडी चीज़ें खाएं: गले में दर्द होने पर नरम और ठंडी चीज़ें जैसे दही, आइसक्रीम, दलिया या मैश किए हुए आलू खाएं। ये निगलने में आसान होते हैं और गले को आराम देते हैं।
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पर्याप्त आराम करें: शरीर को इन्फेक्शन से लड़ने के लिए पूरी तरह से आराम दें। ज़्यादा शारीरिक गतिविधि से बचें।
बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न लें: हर गले के दर्द में एंटीबायोटिक की ज़रूरत नहीं होती। अगर इन्फेक्शन वायरल है, तो एंटीबायोटिक लेने से कोई फायदा नहीं होगा, बल्कि यह शरीर के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकता है।
बचाव
दिल्ली में टॉन्सिल बढ़ने से बचाव के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है, खासकर यहां के मौसम और प्रदूषण को देखते हुए।
- हाथों की स्वच्छता बनाए रखें: अपने हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोएं, खासकर खाने से पहले और खांसने या छींकने के बाद। यह इन्फेक्शन फैलाने वाले कीटाणुओं को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
- प्रदूषण से बचें: दिल्ली में प्रदूषण का स्तर अक्सर बहुत ज़्यादा रहता है, खासकर सर्दियों में और पराली जलाने के समय। ऐसे समय में घर से बाहर कम निकलें और अगर ज़रूरी हो तो अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क पहनें। यह गले में जलन और इन्फेक्शन के खतरे को कम करता है।
- पर्याप्त नींद लें और स्वस्थ आहार लें: शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखने के लिए पर्याप्त नींद लेना और पौष्टिक आहार लेना बहुत ज़रूरी है। एक मजबूत इम्यून सिस्टम इन्फेक्शन से बेहतर तरीके से लड़ पाता है।
- गले को नम रखें: दिल्ली की शुष्क हवा, खासकर सर्दियों में, गले को सूखा सकती है। खूब पानी पिएं और गले को नम रखने के लिए गरारे करें। अगर ज़रूरत हो तो घर में ह्यूमिडिफायर का उपयोग भी कर सकते हैं।
- बीमार लोगों से दूरी बनाए रखें: अगर आपके आसपास कोई बीमार है, तो उनसे उचित दूरी बनाए रखें ताकि इन्फेक्शन आप तक न पहुंचे। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढंकने के लिए कहें।
WHO और AAO-HNS की guidelines के अनुसार, इस तरह के लक्षणों में ENT specialist से जाँच कराना ज़रूरी है।
बच्चों और बुज़ुर्गों में
टॉन्सिल बढ़ने की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन बच्चों और बुज़ुर्गों में इसके लक्षण और प्रबंधन में कुछ अंतर हो सकते हैं।
बच्चों में
बच्चों में टॉन्सिल बढ़ना बहुत आम है, खासकर 5 से 15 साल की उम्र के बच्चों में। उनके टॉन्सिल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का एक सक्रिय हिस्सा होते हैं और इन्फेक्शन के प्रति ज़्यादा प्रतिक्रिया देते हैं। बच्चों में लक्षण अक्सर ज़्यादा गंभीर होते हैं, जैसे तेज़ बुखार, निगलने में बहुत ज़्यादा दर्द, और कभी-कभी उल्टी भी हो सकती है।
छोटे बच्चे अपने दर्द को ठीक से बता नहीं पाते, इसलिए माता-पिता को उनके व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए – जैसे चिड़चिड़ापन, खाना न खाना, या गले को छूना। अगर बच्चे के टॉन्सिल बहुत ज़्यादा सूज जाएं और उसे सांस लेने में दिक्कत हो, तो यह एक आपातकालीन स्थिति हो सकती है।
बुज़ुर्गों में
बुज़ुर्गों में टॉन्सिल बढ़ने की समस्या उतनी आम नहीं होती जितनी बच्चों में, लेकिन जब होती है तो इसके कुछ अलग पहलू हो सकते हैं। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होने के कारण इन्फेक्शन ठीक होने में ज़्यादा समय लग सकता है। बुज़ुर्गों में पेरिटॉन्सिलर एब्सेस जैसी जटिलताओं का खतरा ज़्यादा हो सकता है।
अगर किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति के टॉन्सिल एक तरफ से असामान्य रूप से बढ़े हुए दिखें, खासकर अगर वे धूम्रपान करते हों, तो डॉक्टर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की संभावना को भी ध्यान में रखते हैं। इसलिए, बुज़ुर्गों में टॉन्सिल बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करवाना बहुत ज़रूरी है।
अस्वीकरण
यह लेख सिर्फ शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह से डॉक्टर की सलाह, जांच या इलाज की जगह नहीं ले सकता। कोई भी दवाई या इलाज अपने डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद न करें।
क्या टॉन्सिलाइटिस संक्रामक है?
हाँ, टॉन्सिलिटिस आमतौर पर संक्रामक होता है, क्योंकि यह वायरस या बैक्टीरिया के कारण होता है जो श्वसन बूंदों, जैसे खांसी या छींक से फैलते हैं। अच्छी हाथ स्वच्छता का अभ्यास करना और दूसरों के साथ निकट संपर्क से बचना इसके प्रसार को रोकने में मदद कर सकता है।
टॉन्सिलाइटिस से ठीक होने में कितना समय लगता है?
टॉन्सिलिटिस के अधिकांश मामले, चाहे वे वायरल हों या बैक्टीरियल, अपेक्षाकृत जल्दी ठीक हो जाते हैं, अक्सर कुछ दिनों से लेकर एक सप्ताह के भीतर। दर्द निवारक और आराम जैसे लक्षणात्मक उपचार ठीक होने के दौरान परेशानी को प्रबंधित करने में मदद कर सकते हैं और दर्द के समाधान को तेज कर सकते हैं।
गले में खराश और टॉन्सिलिटिस में क्या अंतर है?
गले का दर्द गले में होने वाले दर्द के लिए एक सामान्य शब्द है, जिसके कई कारण हो सकते हैं। टॉन्सिलिटिस का मतलब विशेष रूप से टॉन्सिल (गले के पीछे दो अंडाकार ऊतक) की सूजन है, जिसमें आमतौर पर ज़्यादा गंभीर दर्द, निगलने में दिक्कत, सफेद धब्बों के साथ सूजे हुए टॉन्सिल और बुखार होता है। आपके डॉक्टर आपके गले की जांच करके इन दोनों के बीच का अंतर बता सकते हैं।
क्या टॉन्सिलिटिस में हमेशा एंटीबायोटिक्स की आवश्यकता होती है?
नहीं। बच्चों और वयस्कों में ज़्यादातर टॉन्सिलिटिस वायरल होता है, और एंटीबायोटिक्स वायरस पर काम नहीं करते। एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरियल टॉन्सिलिटिस (स्ट्रेप) के लिए ज़रूरी होते हैं, जिसकी पहचान आपके डॉक्टर जांच या थ्रोट स्वैब टेस्ट से कर सकते हैं।
अनावश्यक एंटीबायोटिक्स लेने से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस होता है, इसलिए एंटीबायोटिक्स लेने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।
टॉन्सिल कब निकालने पड़ते हैं?
टॉन्सिल हटाने की सर्जरी (टॉन्सिल्लेक्टोमी) की सलाह तब दी जाती है जब किसी मरीज़ को एक साल में 7 या उससे ज़्यादा बार, दो साल तक हर साल 5 या उससे ज़्यादा बार, या तीन साल तक हर साल 3 या उससे ज़्यादा बार टॉन्सिलिटिस होता है। यह बढ़े हुए टॉन्सिल के लिए भी सुझाया जाता है, जिनसे सांस लेने में दिक्कत, स्लीप एपनिया या खाने में परेशानी होती है। आपके ENT विशेषज्ञ आपकी विशेष स्थिति के आधार पर आपको सलाह देंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या टॉन्सिलिटिस से मुंह से दुर्गंध आ सकती है?
हाँ। संक्रमित टॉन्सिल से मवाद और बैक्टीरिया निकलते हैं जो साँसों की दुर्गंध का कारण बनते हैं। टॉन्सिल स्टोन (टॉन्सिल के गड्ढों में फंसे छोटे सफेद जमाव) भी टॉन्सिल से संबंधित साँसों की दुर्गंध का एक और आम कारण हैं। गुनगुने नमक के पानी से नियमित गरारे करने से मदद मिलती है। यदि अच्छी मौखिक स्वच्छता के बावजूद साँसों की दुर्गंध बनी रहती है, तो किसी ENT विशेषज्ञ से मिलें।
Is टॉन्सिल बढ़ना dangerous?
Tonsillitis के ज़्यादातर मामले खतरनाक नहीं होते और उचित इलाज से ठीक हो जाते हैं। हालाँकि, अनुपचारित बैक्टीरियल Tonsillitis से peritonsillar abscess हो सकता है, जो दर्दनाक होता है और इसे तुरंत निकालने की आवश्यकता होती है। दुर्लभ मामलों में, strep Tonsillitis हृदय या गुर्दे को प्रभावित कर सकता है। यदि दर्द गंभीर है या केवल एक तरफ है, तो डॉक्टर को दिखाएँ।
टॉन्सिलिटिस के दौरान मैं क्या खा सकता हूँ?
नरम, बिना मसाले वाले खाद्य पदार्थ खाएँ जो निगलने में आसान हों: जैसे खिचड़ी, दलिया, दाल, दही, केला, आइसक्रीम (गले को आराम देती है) और सूप। खूब सारे गर्म तरल पदार्थ पिएँ। तले हुए, कुरकुरे और बहुत गर्म या बहुत मसालेदार खाद्य पदार्थों से बचें क्योंकि वे टॉन्सिल को और ज़्यादा परेशान करते हैं। ठंडा पानी और बर्फ के टुकड़े गले के दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं।
टॉन्सिलाइटिस क्यों होता है?
टॉन्सिलिटिस मुख्य रूप से संक्रमणों के कारण होता है, जिनमें सबसे आम वायरस जैसे राइनोवायरस या एडेनोवायरस हैं, जो बड़ी संख्या में मामलों के लिए जिम्मेदार होते हैं। बैक्टीरिया, खासकर ग्रुप ए बीटा-हीमोलिटिक स्ट्रेप्टोकोकी (GABHS), भी अक्सर इसके कारण होते हैं। आपके डॉक्टर विशिष्ट कारण का पता लगाने में मदद कर सकते हैं।
डॉक्टर टॉन्सिलाइटिस की जांच कैसे करते हैं?
डॉक्टर आमतौर पर आपके गले की जांच करके टॉन्सिलिटिस का निदान करते हैं, जिसमें बढ़े हुए या लाल टॉन्सिल और मवाद जैसे लक्षण देखे जाते हैं। वे एक क्लिनिकल स्कोरिंग सिस्टम का भी उपयोग कर सकते हैं, या कुछ मामलों में, संक्रमण पैदा करने वाले विशिष्ट कीटाणु की पहचान करने के लिए गले के स्वाब का आदेश दे सकते हैं।
📞 अभी संपर्क करें: Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB ENT, CAMVD) से परामर्श के लिए 7393062200 पर कॉल या WhatsApp करें।
🏥 Dr. Prateek Porwal पूरे भारत के मरीज़ों को ऑनलाइन परामर्श देते हैं — NMC Telemedicine Guidelines 2020 के अंतर्गत। Video call, WhatsApp या phone: 7393062200
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यह जानकारी शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। अपनी स्वास्थ्य समस्या के लिए हमेशा ENT विशेषज्ञ से मिलें।
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Medically reviewed by: Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB ENT, CAMVD — Last updated: 02 April 2026