दिल्ली में चक्कर आने की समस्या: कारण, लक्षण और उपचार

🩺 Docvani — Indian Vernacular Health Education

Language: हिंदी | City: Delhi
Chapter 1 of 9: लक्षण और पहचान (Symptom Explainer)

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भारत में 90% से ज़्यादा मेडिकल जानकारी अंग्रेज़ी में है। मैंने Docvani बनाया है ताकि मेरा क्लीनिकल अनुभव सरल हिंदी में हर मरीज़ तक पहुँचे।

✍️ AI draft — Dr. Prateek Porwal (MBBS, DNB (ENT), CAMVD) द्वारा शब्द-दर-शब्द मेडिकल ऑडिट (NMC: 82487) — 2026-03-19

चक्कर आना - चक्कर आना

जब अचानक सब कुछ घूमने लगता है, धरती हिलती लगती है, तो डर लगना बिल्कुल स्वाभाविक है। दिल्ली में मेरे पास ऐसे कई मरीज आते हैं जिन्हें चक्कर आने की शिकायत होती है। यह सिर्फ एक थकान या कमज़ोरी नहीं है – यह आपके शरीर के संतुलन सिस्टम का एक संकेत है कि कुछ ठीक नहीं है। घबराएं नहीं, सही जानकारी और समय पर जांच से इस समस्या का समाधान मिल सकता है।

चक्कर आना क्या है?

चक्कर आना एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपको या आपके आस-पास की चीज़ों को घूमने का झूठा एहसास होता है, जबकि असल में कोई गति नहीं हो रही होती। यह एक लक्षण है, कोई बीमारी नहीं। कई बार मरीज इसे सिर्फ़ सिर भारी लगना या आँखों के आगे अंधेरा छाना समझते हैं, पर चक्कर आने में असल में आपको लगता है कि आप घूम रहे हैं या कमरा घूम रहा है। यह अक्सर कान के अंदरूनी हिस्से या दिमाग से जुड़ी किसी समस्या के कारण होता है। दिल्ली जैसे बड़े शहर में, जहाँ लोग अक्सर तनाव और भागदौड़ भरी ज़िंदगी जीते हैं, चक्कर आने के मामले काफी देखने को मिलते हैं।

चक्कर आने के लक्षण

चक्कर आने के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य संकेत हैं जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

  • घूमने का एहसास: आपको ऐसा महसूस होगा जैसे आप खुद घूम रहे हैं या आपके आस-पास की चीज़ें घूम रही हैं। यह सबसे आम और परेशान करने वाला लक्षण है।
  • अस्थिरता और चलने में दिक्कत: आपको सीधा चलने में परेशानी होगी, ऐसा लगेगा जैसे आप लड़खड़ा रहे हैं या गिरने वाले हैं। इससे रोज़मर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है।
  • जी मिचलाना और उल्टी: चक्कर आने के साथ-साथ कई बार जी मिचलाने लगता है और कुछ मरीजों को उल्टी भी हो जाती है। यह शरीर की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है।
  • असामान्य आँखों की हरकत: डॉक्टर जांच के दौरान आपकी आँखों की असामान्य हरकतों को देख सकते हैं। यह अंदरूनी कान या दिमाग की समस्या का संकेत हो सकता है।
  • पसीना आना और चिपचिपी त्वचा: चक्कर आने के दौरे के दौरान कुछ लोगों को बहुत पसीना आता है और उनकी त्वचा चिपचिपी महसूस होती है। यह शरीर के तनाव की वजह से होता है।
  • सिर हिलाने पर बिगड़ना: सिर को तेज़ी से हिलाने या किसी खास पोजीशन में रखने पर चक्कर और ज़्यादा बढ़ सकते हैं। यह BPPV जैसे कारणों में बहुत आम है।
  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी: चक्कर आने के दौरान आँखों को किसी एक चीज़ पर टिकाना या ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो सकता है। इससे रोज़मर्रा के काम प्रभावित होते हैं।
  • कान में घंटी बजना या सुनने में कमी: कुछ मामलों में, चक्कर आने के साथ कान में सीटी बजने या घंटी बजने जैसी आवाज़ें आ सकती हैं, या सुनने में कमी भी महसूस हो सकती है।

तुरंत डॉक्टर के पास कब जाएं?

कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि वे किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं।

  • अचानक तेज़ सिरदर्द के साथ चक्कर आना: अगर आपको चक्कर आने के साथ अचानक बहुत तेज़ सिरदर्द हो, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। तुरंत इमरजेंसी में जाएं।
  • चक्कर आने के साथ दोहरी दृष्टि या बोलने/निगलने में दिक्कत: ये लक्षण दिमाग से जुड़ी गंभीर समस्या, जैसे स्ट्रोक, की ओर इशारा करते हैं। बिना देर किए डॉक्टर को दिखाएं।
  • अचानक चेहरे पर सुन्नपन या कमज़ोरी के साथ चक्कर आना: अगर आपके चेहरे के एक तरफ सुन्नपन या कमज़ोरी महसूस हो, तो यह भी स्ट्रोक का एक महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत है।
  • चलने में पूरी तरह असमर्थता के साथ चक्कर आना: अगर आप चक्कर आने के कारण बिल्कुल भी चल न पाएं और संतुलन पूरी तरह खो दें, तो यह दिमाग की गंभीर समस्या हो सकती है।
  • सिर में चोट लगने के बाद नया चक्कर आना: किसी भी तरह की सिर की चोट के बाद अगर चक्कर आने लगें, तो तुरंत जांच करवाना ज़रूरी है ताकि अंदरूनी चोट का पता चल सके।
  • 60 साल से ज़्यादा उम्र के व्यक्ति में पहली बार चक्कर आना: अगर किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति को पहले कभी चक्कर नहीं आए और अब अचानक आने लगें, तो स्ट्रोक या अन्य गंभीर कारणों को बाहर करना ज़रूरी है।

चक्कर आने के कारण

चक्कर आने के कई कारण हो सकते हैं, और सही इलाज के लिए इसके मूल कारण का पता लगाना बहुत ज़रूरी है। मेरे Prime ENT Center में, मैंने देखा है कि ज़्यादातर मामले अंदरूनी कान से जुड़े होते हैं, लेकिन दिमाग से जुड़े कारण भी हो सकते हैं।

  • BPPV (Benign Paroxysmal Positional चक्कर आना): यह चक्कर आने का सबसे आम कारण है। इसमें अंदरूनी कान में मौजूद छोटे कैल्शियम के क्रिस्टल अपनी जगह से हटकर semicircular canals में चले जाते हैं। जब आप सिर को किसी खास पोजीशन में हिलाते हैं, जैसे बिस्तर पर करवट लेते समय या ऊपर देखते समय, तो ये क्रिस्टल हिलते हैं और तेज़ चक्कर आने लगते हैं। यह आमतौर पर कुछ सेकंड तक रहता है।
  • Vestibular neuritis या labyrinthitis: यह अंदरूनी कान की नस या पूरे अंदरूनी कान में इन्फेक्शन या सूजन के कारण होता है। अक्सर यह किसी वायरल इन्फेक्शन, जैसे फ्लू, के बाद होता है। इसमें चक्कर बहुत तेज़ होते हैं और कई दिनों तक रह सकते हैं, साथ में जी मिचलाना और उल्टी भी हो सकती है। Labyrinthitis में सुनने में भी कमी आ सकती है।
  • Meniere’s disease: इस बीमारी में अंदरूनी कान में तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिससे दबाव बढ़ जाता है। इसके लक्षणों में चक्कर आने के बार-बार आने वाले दौरे, कान में घंटी बजना, सुनने में कमी और कान में भारीपन महसूस होना शामिल हैं। यह एक क्रॉनिक कंडीशन है जिसे मैनेज करना ज़रूरी होता है।
  • माइग्रेन से जुड़ा चक्कर आना (vestibular migraine): कुछ लोगों को माइग्रेन के साथ या उसके बिना भी चक्कर आ सकते हैं। इसमें सिरदर्द के बजाय चक्कर मुख्य लक्षण होते हैं। यह किसी भी उम्र में हो सकता है और इसके दौरे कुछ मिनट से लेकर कई घंटों तक चल सकते हैं।
  • दवाओं के साइड इफेक्ट्स: कुछ दवाएं, जैसे ब्लड प्रेशर की दवाएं, नींद की गोलियां, या कुछ एंटीबायोटिक्स, चक्कर आना या चक्कर आने का कारण बन सकती हैं। अगर आपको कोई नई दवा शुरू करने के बाद चक्कर आ रहे हैं, तो अपने डॉक्टर को ज़रूर बताएं।
  • सिर की चोट या whiplash: सिर या गर्दन पर लगी चोट, जैसे कार दुर्घटना में, अंदरूनी कान या दिमाग के संतुलन वाले हिस्से को प्रभावित कर सकती है, जिससे चक्कर आना हो सकता है। चोट के बाद चक्कर आना एक गंभीर संकेत हो सकता है।
  • चिंता और पैनिक अटैक: कभी-कभी बहुत ज़्यादा चिंता या पैनिक अटैक के दौरान भी लोगों को चक्कर आने या सिर घूमने जैसा महसूस हो सकता है। हालांकि, यह असली चक्कर आने से अलग होता है, पर लक्षण मिलते-जुलते हो सकते हैं।
  • दिमाग से जुड़ी समस्याएं: कुछ दुर्लभ लेकिन गंभीर मामलों में, चक्कर आना दिमाग के संतुलन वाले हिस्से, जैसे brainstem या cerebellum में स्ट्रोक, ट्यूमर या मल्टीपल स्केलेरोसिस जैसी समस्याओं के कारण हो सकता है। ऐसे मामलों में अक्सर चक्कर आने के साथ अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी होते हैं।

Delhi में इस समस्या के स्थानीय कारण

दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए कुछ खास बातें हैं जो चक्कर आने की समस्या को बढ़ा सकती हैं या उसके कारणों में शामिल हो सकती हैं:

  • तनाव और भागदौड़ भरी ज़िंदगी: दिल्ली की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी और काम का दबाव कई लोगों में तनाव और चिंता का कारण बनता है। यह तनाव सीधे तौर पर चक्कर आने का कारण नहीं बनता, लेकिन यह माइग्रेन से जुड़े चक्कर आने को ट्रिगर कर सकता है या चक्कर आने के लक्षणों को और खराब कर सकता है।
  • वायु प्रदूषण (PM 2.5 और स्मॉग): दिल्ली का भारी वायु प्रदूषण, खासकर पराली जलाने और दिवाली के बाद, श्वसन संबंधी समस्याओं को बढ़ाता है। हालांकि यह सीधे चक्कर आने का कारण नहीं है, लेकिन यह एलर्जी और साइनस की समस्याओं को बढ़ा सकता है, जो अप्रत्यक्ष रूप से कान के दबाव को प्रभावित कर सकते हैं और कुछ लोगों में चक्कर आने का कारण बन सकते हैं।
  • सर्दी में कोहरा और तापमान में बदलाव: दिल्ली की कड़ाके की ठंड और घना कोहरा कई लोगों में सर्दी-जुकाम और वायरल इन्फेक्शन का कारण बनता है। ये इन्फेक्शन अंदरूनी कान तक पहुंचकर vestibular neuritis या labyrinthitis का कारण बन सकते हैं, जिससे तेज़ चक्कर आने के दौरे पड़ते हैं।
  • पानी की गुणवत्ता और जलजनित बीमारियां: मानसून के दौरान दिल्ली और आसपास के इलाकों में जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। कुछ वायरल इन्फेक्शन जो पेट को प्रभावित करते हैं, वे अंदरूनी कान को भी प्रभावित कर सकते हैं, जिससे चक्कर आना हो सकता है।
  • गर्मी में डिहाइड्रेशन: दिल्ली की भीषण गर्मी में पर्याप्त पानी न पीने से डिहाइड्रेशन हो सकता है। डिहाइड्रेशन से ब्लड प्रेशर कम हो सकता है, जिससे चक्कर आने जैसा महसूस हो सकता है, हालांकि यह असली चक्कर आना नहीं होता, पर इसके लक्षण मिलते-जुलते हो सकते हैं।

जांच और निदान

जब आप मेरे Prime ENT Center में चक्कर आने की शिकायत लेकर आते हैं, तो सबसे पहले मैं आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री लेता हूँ। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि आपको चक्कर कब आते हैं, कितनी देर तक रहते हैं, और उनके साथ और क्या-क्या लक्षण महसूस होते हैं। मैं आपसे पूछूंगा कि क्या आपको सिर घूमना, सिर भारी लगना, आँखों के आगे अंधेरा छाना, या गिरने जैसा लगना महसूस होता है।

इसके बाद, मैं एक शारीरिक जांच करता हूँ। इसमें आपके कान, नाक और गले की जांच शामिल होती है। मैं आपके संतुलन और आँखों की हरकतों को ध्यान से देखता हूँ। चक्कर आने के निदान के लिए कुछ खास टेस्ट किए जाते हैं:

  • Dix-Hallpike test: यह BPPV का पता लगाने के लिए gold standard टेस्ट है। इसमें मैं आपके सिर को एक खास तरीके से हिलाकर आपको लिटाता हूँ और आपकी आँखों की हरकतों को देखता हूँ। अगर आपको चक्कर आते हैं और आँखों में खास तरह की हरकत दिखती है, तो BPPV का निदान हो जाता है।
  • VNG (Videonystagmography): यह एक विस्तृत जांच है जो आँखों की हरकतों को रिकॉर्ड करती है। इससे यह पता चलता है कि आपके अंदरूनी कान का कौन सा हिस्सा प्रभावित है और संतुलन प्रणाली कैसे काम कर रही है। यह टेस्ट चक्कर आने के कारण का पता लगाने में बहुत मदद करता है।
  • PTA (Pure Tone Audiometry): अगर आपको सुनने में कमी या कान में घंटी बजने की शिकायत है, तो यह सुनने की जांच की जाती है। यह Meniere’s disease जैसे कारणों का पता लगाने में सहायक हो सकती है।
  • MRI या CT scan: कुछ मामलों में, खासकर अगर मुझे दिमाग से जुड़ी किसी समस्या का संदेह होता है (जैसे कि अगर आपको red flag लक्षण हैं), तो मैं दिमाग का MRI या CT scan करवाने की सलाह दे सकता हूँ। यह दिमाग में स्ट्रोक, ट्यूमर या अन्य संरचनात्मक समस्याओं को बाहर करने में मदद करता है।

इन सभी जांचों के बाद ही मैं चक्कर आने के सही कारण का पता लगा पाता हूँ और फिर आपके लिए सबसे अच्छा इलाज तय कर पाता हूँ। मेरा लक्ष्य आपको जल्द से जल्द आराम दिलाना है।

इलाज के विकल्प

चक्कर आने का इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है। सही निदान के बाद ही प्रभावी इलाज संभव है।

घर पर राहत

जब तक आप डॉक्टर के पास नहीं पहुंच पाते, तब तक कुछ चीजें हैं जो आप घर पर करके थोड़ी राहत पा सकते हैं:

  • धीरे-धीरे चलें और अचानक सिर न हिलाएं: चक्कर आने पर तेज़ी से उठने या सिर हिलाने से बचें। धीरे-धीरे चलें और किसी चीज़ का सहारा लेकर चलें ताकि गिरने का खतरा कम हो।
  • पर्याप्त आराम करें और तनाव से बचें: चक्कर आने के दौरान शरीर को आराम देना बहुत ज़रूरी है। तनाव से चक्कर और बढ़ सकते हैं, इसलिए शांत रहने की कोशिश करें।
  • हाइड्रेटेड रहें: पर्याप्त पानी पिएं, खासकर दिल्ली की गर्मी में। डिहाइड्रेशन से चक्कर आने जैसा महसूस हो सकता है।

डॉक्टर का इलाज

डॉक्टर द्वारा किया जाने वाला इलाज चक्कर आने के कारण पर आधारित होता है:

  • BPPV के लिए Epley Maneuver: अगर BPPV का निदान होता है, तो मैं Epley Maneuver करता हूँ। यह एक सरल और बहुत प्रभावी प्रक्रिया है जिसमें सिर को खास तरीके से हिलाकर अंदरूनी कान के क्रिस्टल को उनकी सही जगह पर वापस लाया जाता है। ज़्यादातर मरीजों को एक या दो सेशन में ही आराम मिल जाता है।
  • दवाएं: आपके डॉक्टर जी मिचलाने और चक्कर को कम करने के लिए कुछ दवाएं दे सकते हैं। अगर Vestibular neuritis या labyrinthitis है, तो सूजन कम करने के लिए स्टेरॉयड दिए जा सकते हैं।
  • Vestibular rehabilitation exercises: ये खास तरह के व्यायाम होते हैं जो आपके संतुलन सिस्टम को फिर से प्रशिक्षित करने में मदद करते हैं। ये व्यायाम धीरे-धीरे किए जाते हैं और संतुलन को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं।
  • Meniere’s disease का प्रबंधन: Meniere’s disease के लिए, डॉक्टर नमक कम करने और कुछ दवाएं (जैसे diuretics) लेने की सलाह दे सकते हैं ताकि अंदरूनी कान में तरल पदार्थ का दबाव कम हो सके।

सर्जरी कब?

चक्कर आने के ज़्यादातर मामलों में सर्जरी की ज़रूरत नहीं पड़ती। BPPV, vestibular neuritis और माइग्रेन से जुड़े चक्कर आने का इलाज दवाओं और व्यायाम से हो जाता है।

  • Meniere’s disease में: बहुत ही दुर्लभ मामलों में, जब Meniere’s disease का इलाज दवाओं और जीवनशैली में बदलाव से नहीं हो पाता और मरीज को बहुत ज़्यादा परेशानी होती है, तो कुछ सर्जिकल विकल्प (जैसे endolymphatic sac decompression) पर विचार किया जा सकता है।
  • दिमाग से जुड़ी समस्याओं में: अगर चक्कर आने का कारण दिमाग में कोई ट्यूमर या अन्य संरचनात्मक समस्या है, तो उस स्थिति में न्यूरोसर्जन द्वारा सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है। यह ENT विशेषज्ञ के दायरे से बाहर होता है।

घर पर क्या करें, क्या न करें?

चक्कर आने के दौरान घर पर कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है ताकि आप सुरक्षित रहें और लक्षणों को बिगड़ने से बचा सकें।

  • क्या करें:
  • धीरे-धीरे उठें और बैठें: बिस्तर से उठते समय या कुर्सी से खड़े होते समय हमेशा धीरे-धीरे उठें। पहले कुछ सेकंड के लिए किनारे पर बैठें, फिर खड़े हों। इससे अचानक चक्कर आने का खतरा कम होता है।
  • पर्याप्त नींद लें: शरीर को पर्याप्त आराम देना बहुत ज़रूरी है। नींद की कमी से चक्कर आने के लक्षण और बिगड़ सकते हैं। एक नियमित नींद का पैटर्न बनाए रखने की कोशिश करें।
  • घर को सुरक्षित रखें: अपने घर से उन चीज़ों को हटा दें जिनसे ठोकर लग सकती है, जैसे ढीले कालीन या तार। रात में रोशनी का इस्तेमाल करें ताकि गिरने का खतरा कम हो।
  • हाइड्रेटेड रहें और संतुलित आहार लें: पर्याप्त पानी पिएं और पौष्टिक भोजन करें। शराब और कैफीन का सेवन कम करें, क्योंकि ये डिहाइड्रेशन का कारण बन सकते हैं और चक्कर आने को बढ़ा सकते हैं।

    क्या न करें:

    बचाव

    चक्कर आने के कुछ कारणों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन कुछ सामान्य उपाय हैं जिनसे आप इसके जोखिम को कम कर सकते हैं या इसके लक्षणों को मैनेज कर सकते हैं, खासकर दिल्ली जैसे शहर में।

    • तनाव प्रबंधन सीखें: दिल्ली की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में तनाव एक बड़ी समस्या है। योग, ध्यान, या गहरी सांस लेने के व्यायाम तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं। तनाव कम होने से माइग्रेन से जुड़े चक्कर आने के दौरे कम हो सकते हैं।
    • पर्याप्त नींद लें और नियमित दिनचर्या बनाए रखें: एक अच्छी नींद और नियमित दिनचर्या शरीर के संतुलन सिस्टम को स्थिर रखने में मदद करती है। सोने और जागने का एक निश्चित समय निर्धारित करें, भले ही आप दिल्ली में देर रात तक काम करते हों।
    • स्वस्थ आहार और हाइड्रेशन: संतुलित आहार लें और पर्याप्त पानी पिएं। दिल्ली की गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचना बहुत ज़रूरी है। नमक का सेवन कम करें, खासकर अगर आपको Meniere’s disease का खतरा है।
    • कानों को इन्फेक्शन से बचाएं: सर्दी-जुकाम या फ्लू के दौरान अपने कानों का खास ख्याल रखें। प्रदूषण वाले माहौल में मास्क का उपयोग करें ताकि श्वसन इन्फेक्शन से बचा जा सके, जो अंदरूनी कान तक फैल सकते हैं।
    • नियमित व्यायाम करें: नियमित रूप से व्यायाम करने से शरीर का संतुलन और समन्वय बेहतर होता है। हल्के व्यायाम जैसे चलना या योग, संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
    • धूल और प्रदूषण से बचाव: दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है। बाहर निकलते समय मास्क पहनें, खासकर प्रदूषण के उच्च स्तर वाले दिनों में (जैसे दिवाली के बाद या पराली जलाने के मौसम में)। यह श्वसन संबंधी इन्फेक्शन और एलर्जी को कम करने में मदद करेगा।

    बच्चों और बुज़ुर्गों में

    चक्कर आना किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन बच्चों और बुज़ुर्गों में इसके लक्षण और कारण थोड़े अलग हो सकते हैं।

    बच्चों में

    बच्चों में चक्कर आने का पता लगाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है क्योंकि वे अपने लक्षणों को ठीक से बता नहीं पाते। बच्चे अक्सर “चक्कर आना” नहीं कहते, बल्कि “सिर घूम रहा है”, “गिरने जैसा लग रहा है” या “कमरा हिल रहा है” जैसे शब्द इस्तेमाल कर सकते हैं। वे अस्थिरता के कारण बार-बार गिर सकते हैं, खेलने से मना कर सकते हैं, या जी मिचलाने और उल्टी की शिकायत कर सकते हैं। बच्चों में BPPV, माइग्रेन से जुड़ा चक्कर आना, या अंदरूनी कान का इन्फेक्शन आम कारण हो सकते हैं। अगर आपका बच्चा बार-बार संतुलन खो रहा है या असामान्य रूप से शांत और सुस्त है, तो डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

    बुज़ुर्गों में

    बुज़ुर्गों में चक्कर आना ज़्यादा आम होता है और इसके कारण भी ज़्यादा जटिल हो सकते हैं। उम्र के साथ अंदरूनी कान का संतुलन सिस्टम कमज़ोर हो जाता है, जिससे चक्कर आने का खतरा बढ़ जाता है। बुज़ुर्गों में चक्कर आने के साथ गिरने का खतरा भी बहुत ज़्यादा होता है, जिससे गंभीर चोटें लग सकती हैं। ब्लड प्रेशर की दवाएं, डायबिटीज, या दिल की बीमारियां भी चक्कर आने का कारण बन सकती हैं। बुज़ुर्गों में स्ट्रोक जैसे गंभीर कारणों को बाहर करना और भी ज़रूरी हो जाता है। अगर किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति को पहली बार चक्कर आ रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

    आम गलतफहमियां और सच्चाई

    मेरे पास रोज़ ऐसे मरीज आते हैं जो चक्कर आने को लेकर कई तरह की गलतफहमियां पाले हुए होते हैं। मैं समझता हूँ कि इंटरनेट पर या लोगों से सुनकर कई तरह की बातें फैल जाती हैं, पर सच जानना बहुत ज़रूरी है।

    गलतफहमी: चक्कर आना सिर्फ कमज़ोरी या लो ब्लड प्रेशर की वजह से होता है।
    सच्चाई: यह बहुत आम गलतफहमी है। ज़्यादातर मामलों में (लगभग 80%), चक्कर अंदरूनी कान के संतुलन सिस्टम की समस्या के कारण आते हैं, न कि सिर्फ कमज़ोरी या लो ब्लड प्रेशर से। ताक़त की दवाइयों से असली चक्कर आने में आराम नहीं मिलेगा – सही जांच ज़रूरी है।

    गलतफहमी: चक्कर आने का कोई इलाज नहीं है, यह ज़िंदगी भर रहेगा।
    सच्चाई: यह बिल्कुल गलत है। चक्कर आने के ज़्यादातर कारण पूरी तरह से इलाज योग्य हैं। BPPV, जो सबसे आम कारण है, को Epley Maneuver जैसी सरल प्रक्रिया से ठीक किया जा सकता है। Vestibular neuritis भी समय के साथ ठीक हो जाता है। Meniere’s disease जैसी क्रॉनिक स्थितियों को भी दवाओं और जीवनशैली में बदलाव से प्रभावी ढंग से मैनेज किया जा सकता है।

    गलतफहमी: चक्कर आने पर तुरंत उठकर पानी पीना चाहिए।
    सच्चाई: यह सबसे बड़ी गलती है जो लोग करते हैं। अचानक चक्कर आने पर तुरंत उठने से आप गिर सकते हैं और खुद को चोट पहुंचा सकते हैं। सबसे पहले, जहां हैं वहीं शांति से लेट जाएं या बैठ जाएं। अपनी आँखें बंद करें और गहरी सांस लें। जब तक घूमने का एहसास कम न हो जाए, तब तक धीरे-धीरे हिलें।

    गलतफहमी: चक्कर आना सिर्फ बुज़ुर्गों को होता है।
    सच्चाई: चक्कर आना किसी भी उम्र में हो सकता है, बच्चों और युवाओं में भी। हालांकि यह बुज़ुर्गों में ज़्यादा आम है, लेकिन माइग्रेन से जुड़ा चक्कर आना या अंदरूनी कान के इन्फेक्शन बच्चों और युवा वयस्कों में भी देखे जाते हैं। उम्र कोई बाधा नहीं है, अगर आपको चक्कर आ रहे हैं तो जांच करवाएं।

    गलतफहमी: चक्कर आने का मतलब है कि आपके दिमाग में कोई गंभीर समस्या है।
    सच्चाई: जबकि दिमाग से जुड़े कुछ गंभीर कारण (जैसे स्ट्रोक) चक्कर आने का कारण बन सकते हैं, वे कुल मामलों का केवल 20% होते हैं। ज़्यादातर चक्कर आने के मामले अंदरूनी कान से संबंधित होते हैं और गंभीर नहीं होते। हालांकि, red flag लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    क्या चक्कर आना ब्लड प्रेशर से संबंधित है?

    मैं समझता हूँ कि कई लोग ऐसा सोचते हैं। कम ब्लड प्रेशर (खासकर जब आप तेज़ी से खड़े होते हैं, जिसे orthostatic hypotension कहते हैं) से हल्कापन और अस्थिरता महसूस हो सकती है। हालांकि, असली चक्कर आना आमतौर पर अंदरूनी कान या दिमाग की समस्या होती है, न कि मुख्य रूप से ब्लड प्रेशर की समस्या। आपके डॉक्टर दोनों की जांच करेंगे ताकि सही कारण का पता चल सके।

    क्या चक्कर आना ब्रेन स्ट्रोक का संकेत हो सकता है?

    यह एक गंभीर चिंता है और मैं इसे समझता हूँ। स्ट्रोक से चक्कर आना हो सकता है, लेकिन यह शायद ही कभी अकेला लक्षण होता है। स्ट्रोक से संबंधित चक्कर आने के साथ आमतौर पर अन्य चेतावनी संकेत भी होते हैं: जैसे अचानक दोहरी दृष्टि, बोलने या निगलने में कठिनाई, चेहरे पर सुन्नपन, हाथ या पैर में कमज़ोरी, या चलने में असमर्थता। अगर आपको इनमें से किसी भी लक्षण के साथ चक्कर आना है, तो तुरंत इमरजेंसी में जाएं।

    चक्कर आना और dizziness में क्या अंतर है?

    यह एक बहुत अच्छा सवाल है। Dizziness एक व्यापक शब्द है जिसका अर्थ है अस्थिरता, हल्कापन या बेहोशी जैसा महसूस होना। चक्कर आने का विशेष अर्थ है घूमने का झूठा एहसास – जैसे आप या कमरा घूम रहा है। चक्कर आना आमतौर पर अंदरूनी कान या दिमाग की समस्या का संकेत देता है। हल्कापन (बिना घूमने के एहसास के) कम ब्लड प्रेशर, चिंता या डिहाइड्रेशन के कारण हो सकता है।

    क्या मुझे ज़िंदगी भर चक्कर आना रहेगा?

    नहीं, ज़्यादातर मामलों में ऐसा नहीं होता। चक्कर आने के ज़्यादातर कारण इलाज योग्य हैं। BPPV (सबसे आम कारण) को ज़्यादातर मामलों में एक साधारण maneuver से ठीक किया जा सकता है। Vestibular neuritis आमतौर पर कुछ हफ्तों से महीनों के भीतर ठीक हो जाता है। Meniere’s disease क्रॉनिक है लेकिन इसे दवाओं और जीवनशैली में बदलाव से मैनेज किया जा सकता है। सही निदान और इलाज से बार-बार आने वाले चक्कर आने में भी काफी सुधार होता है।

    क्या चक्कर आने के लिए कोई घरेलू उपचार है?

    मैं समझता हूँ कि लोग घर पर ही राहत पाना चाहते हैं। चक्कर आने के दौरान अचानक हिलने-डुलने से बचें, धीरे-धीरे उठें और बैठें, और पर्याप्त आराम करें। अदरक की चाय कुछ लोगों को जी मिचलाने में मदद कर सकती है। हालांकि, कोई भी घरेलू उपचार आज़माने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें, खासकर अगर आपको तेज़ चक्कर आ रहे हों।

    क्या माइग्रेन से भी चक्कर आ सकते हैं?

    हाँ, बिल्कुल। माइग्रेन सिर्फ सिरदर्द का कारण नहीं बनता। कुछ लोगों को माइग्रेन से जुड़ा चक्कर आना (vestibular migraine) होता है, जिसमें सिरदर्द के बजाय चक्कर मुख्य लक्षण होते हैं। ये दौरे कुछ मिनट से लेकर कई घंटों तक चल सकते हैं और इनके साथ जी मिचलाना और रोशनी या आवाज़ के प्रति संवेदनशीलता भी हो सकती है।

    क्या कान में इन्फेक्शन से चक्कर आना हो सकता है?

    हाँ, अंदरूनी कान में इन्फेक्शन या सूजन (जैसे labyrinthitis या vestibular neuritis) चक्कर आने का एक आम कारण है। ये इन्फेक्शन संतुलन बनाए रखने वाली नसों को प्रभावित करते हैं, जिससे तेज़ और लंबे समय तक रहने वाले चक्कर आ सकते हैं। अगर आपको कान में दर्द या सुनने में कमी के साथ चक्कर आ रहे हैं, तो तुरंत जांच करवाएं।

    क्या दिल्ली का प्रदूषण चक्कर आने को बढ़ा सकता है?

    यह एक दिलचस्प सवाल है। सीधे तौर पर प्रदूषण चक्कर आने का कारण नहीं बनता, लेकिन दिल्ली का भारी प्रदूषण श्वसन संबंधी इन्फेक्शन और एलर्जी को बढ़ा सकता है। ये इन्फेक्शन या एलर्जी कभी-कभी अंदरूनी कान को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे चक्कर आने के लक्षण बिगड़ सकते हैं या ट्रिगर हो सकते हैं। अपनी सुरक्षा के लिए मास्क का उपयोग करें।

    चक्कर आने के दौरान गाड़ी चलाना सुरक्षित है?

    नहीं, बिल्कुल नहीं। जब आपको चक्कर आने के दौरे पड़ रहे हों या आपको अस्थिरता महसूस हो रही हो, तो गाड़ी चलाना बहुत खतरनाक हो सकता है। इससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है, जो आपके और दूसरों के लिए जानलेवा हो सकता है। जब तक आपके लक्षण पूरी तरह से ठीक न हो जाएं, तब तक गाड़ी चलाने से बचें।

    क्या चक्कर आने के लिए कोई खास व्यायाम होते हैं?

    हाँ, चक्कर आने के कुछ प्रकारों के लिए खास व्यायाम होते हैं जिन्हें vestibular rehabilitation exercises कहा जाता है। ये व्यायाम आपके संतुलन सिस्टम को फिर से प्रशिक्षित करने में मदद करते हैं और धीरे-धीरे संतुलन में सुधार लाते हैं। आपके डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट आपको सही व्यायाम सिखा सकते हैं।

    बच्चों में चक्कर आने के क्या लक्षण होते हैं?

    बच्चों में चक्कर आने का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। वे अक्सर “चक्कर” शब्द का उपयोग नहीं करते, बल्कि “कमरा घूम रहा है” या “गिरने जैसा लग रहा है” कह सकते हैं। वे अस्थिरता के कारण बार-बार गिर सकते हैं, खेलने से मना कर सकते हैं, या जी मिचलाने और उल्टी की शिकायत कर सकते हैं। अगर आपको अपने बच्चे में ऐसे लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से मिलें।

    बुज़ुर्गों में चक्कर आना क्यों ज़्यादा आम है?

    बुज़ुर्गों में चक्कर आना ज़्यादा आम है क्योंकि उम्र के साथ अंदरूनी कान का संतुलन सिस्टम स्वाभाविक रूप से कमज़ोर हो जाता है। बुज़ुर्गों में कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं (जैसे ब्लड प्रेशर, डायबिटीज) और दवाएं भी चक्कर आने का कारण बन सकती हैं। गिरने का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए समय पर जांच बहुत ज़रूरी है।

    चक्कर आने के इलाज में कितना समय लगता है?

    इलाज का समय चक्कर आने के कारण पर निर्भर करता है। BPPV का इलाज अक्सर एक या दो Epley Maneuver सेशन में हो जाता है। Vestibular neuritis को ठीक होने में कुछ हफ्तों से महीनों लग सकते हैं। Meniere’s disease एक क्रॉनिक स्थिति है जिसे लगातार मैनेज करना पड़ता है। आपके डॉक्टर आपको एक अनुमानित समय बता सकते हैं।

    क्या चक्कर आने से बचाव संभव है?

    कुछ हद तक बचाव संभव है। तनाव कम करना, पर्याप्त नींद लेना, स्वस्थ आहार लेना और हाइड्रेटेड रहना चक्कर आने के जोखिम को कम कर सकता है। दिल्ली में प्रदूषण से बचाव और इन्फेक्शन से दूर रहना भी महत्वपूर्ण है। अगर आपको बार-बार चक्कर आते हैं, तो डॉक्टर से मिलकर मूल कारण का पता लगाना सबसे अच्छा बचाव है।

    क्या चक्कर आने से सिरदर्द भी हो सकता है?

    हाँ, कुछ मामलों में चक्कर आने के साथ सिरदर्द भी हो सकता है। माइग्रेन से जुड़े चक्कर आने में अक्सर सिरदर्द और चक्कर दोनों होते हैं। अगर चक्कर आने का कारण कोई गंभीर समस्या जैसे स्ट्रोक है, तो तेज़ सिरदर्द एक चेतावनी संकेत हो सकता है। अगर आपको दोनों लक्षण एक साथ महसूस हों, तो डॉक्टर से सलाह लें।

    ऑनलाइन कंसल्टेशन कैसे लें

    मैं समझता हूँ कि दिल्ली में रहने वाले मरीजों के लिए Hardoi तक आना हमेशा संभव नहीं होता। आपकी सुविधा के लिए, मेरे Prime ENT Center में ऑनलाइन कंसल्टेशन की सुविधा उपलब्ध है। आप अपने घर बैठे ही WhatsApp, वीडियो कॉल या फोन के ज़रिए मुझसे सलाह ले सकते हैं।

    यह उन मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है जो दिल्ली, नोएडा, गुड़गांव, फरीदाबाद, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा या चंडीगढ़ जैसे आसपास के शहरों में रहते हैं और विशेषज्ञ ENT डॉक्टर से सलाह लेना चाहते हैं। आप अपनी रिपोर्ट्स (जैसे VNG, MRI) मेरे साथ स्क्रीन पर साझा कर सकते हैं, और मैं उन्हें देखकर आपको सही मार्गदर्शन और इलाज की सलाह दे सकता हूँ।

    ऑनलाइन कंसल्टेशन के लिए आप मुझे +91-7393062200 पर WhatsApp कर सकते हैं या कॉल कर सकते हैं। आप मेरी वेबसाइट https://primeentcenter.in पर जाकर भी अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ न करें – सही सलाह से आपकी परेशानी दूर हो सकती है।

    अस्वीकरण

    यह article सिर्फ educational purpose के लिए है। यह किसी भी तरह से doctor की सलाह, जांच या ilaj की जगह नहीं ले सकता। कोई भी dawai या ilaj अपने doctor की सलाह के बिना शुरू या बंद ना करें।

    Medically reviewed by: Dr. Prateek Porwal, MBBS, DNB ENT | Last updated: 01 March 2026


    ⚕️ मेडिकल डिस्क्लेमर

    यह जानकारी शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। अपनी स्वास्थ्य समस्या के लिए हमेशा ENT विशेषज्ञ से मिलें।

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Dr. Prateek Porwal
MBBS, DNB ENT, CAMVD — Vertigo & ENT Specialist

Founder, Prime ENT Center, Hardoi, UP. Inventor of the Bangalore Maneuver for BPPV. Only VNG + Stabilometry clinic in Central UP. Online consultations available across India — drprateekporwal.com · 7393062200

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